कोहिनूर के आलावा ये ८ बहुमूल्य चीजें अभी भी है भारत के बाहर!

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“हिरे में हिरा कोहिनूर”.. जी हाँ आजतक भारत के इस हिरे को सबसे बहुमूल्य हिरा मन जाता है. मगर अफ़सोस क्योंकि भारत का ये बेशुमार हिरा चुरा लिया गया था. आज भी कई बार इस हिरे को भारत में लाने के खातिर कई बार माँग की गई है.

तो वही केंद्र सरकार ने कई बार क़ानूनी दाँव-पेंच लड़ाकर इसे भारत लाने का प्रयास भी किया. मगर इन सारी कोशिशों के बावजूद कोहिनूर को भारत में वापिस नहीं लाया जा सका.

इसके साथ कई देशों ने इस हिरे पर अपने देश के होने की मोहर लगाने की कोशिश भी की,जिसके चलते यह एक विवादस्पद विषय बन गया है. तो कोहिनूर पर अपना हक़ जताने में भारत के साथ साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान जैसे देश शामिल है.

मगर आप ये जानकर चौंक जाएँगे की ना केवल कोहिनूर बल्कि भारत देश की कई बहुमूल्य वस्तुओं को चुराया गया है, जिन्हे भारत में वापिस लेन के खातिर कई वर्षों से चर्चा चल रही है.

कौन कौन सी है वो वस्तुएं जानेंगे विस्तार से.

१. १५०० वर्ष पुराणी बुद्ध की मूर्ति-

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बर्मिंघम के संग्रहालय में मौजूद ५०० किलो की बुद्ध मूर्ति वास्तव में सुल्तानगंज की है. धातु की यह मूर्ति करीबन १५०० वर्ष पुराणी है. १८६१ के दौरान बिहार से भागलपुर के बीच रेल की पटरी को बिछाते वक़्त एक अंग्रेज़ी अफसर को यह मूर्ति मिली थी.

२. रीजेंट हिरा-

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मद्रास के राज्यपाल थॉमस पिट इन्होने इस हिरे को एक व्यापारी से लिया था. जिसके बाद उन्होंने इस हिरे को फ्रांस में भेज दिया. १७१७ में फ्रांस के शासक सम्राट लुई (१४ वें) ने इसे ऑर्लिन में फ्राँस का प्रतिनिधित्व कर रहे ड्यूक फिलिप से ख़रीदा. फिर १७२२ में लुई ने इस हिरे को अपने ताज (मुकुट) में सजा लिया.

३. ओर्लोव हिरा-

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ओर्लोव हिरा दूसरे शतक के दौरान श्रीरंगपट्टम (तमिलनाडु) के कावेरी नदी के किनारे स्थित रंगनाथस्वामी मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति में आँख के रूप में लगाया गया था. और इस हिरे को फ़्रांसिसी सैनिक ने उस मूर्ति से निकाल लिया था, जिसे उसने कई वर्षों तक अपने ही पास रखा. १७५० में फ़्रांसिसी ने इस हिरे को भारत में लाकर अंग्रेजों को बेच दिया.

४. टीपू सुल्तान की तलवार-

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टीपु सुल्तान की मृत्यु श्रीरंगपट्ट्नम के युद्ध के दौरान हुई. उस दौरान ब्रिटेन की सेना ने टीपू सुल्तान की अँगूठी और उनकी तलवार को अपने पास रख लिया. टीपू सुल्तान की ये तलवार भारतीय उद्योगपति विजय माल्याने खरीद ली थी.

५. दरिया-ए-नूर हिरा-

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नादिर शाह ने दिल्ली से ना केवल कोहिनूर बल्कि दरिया-ए-नूर हिरा भी ले लिया था. जिसे वे अपने साथ ईरान ले गए. जिसे महाराजा रणजीत सिंह ने ईरान से अफगानिस्तान की और जाते समय हासिल किया.

मगर बाद में यह हिरा अंग्रेजों के हाथ लग गया. एक प्रदर्शन के दौरान ढाका के नवाब ने इस हिरे को खरीद लिया था. फ़िलहाल यह हिरा ढाका में स्थित सोनाली नामक बैंक में महफूज़ रखा गया है.

६. छत्रपती शिवजी महाराज की “भवानी तलवार”-

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भारत का दौरा करने के लिए जब ब्रिटेन के राजकुमार एडवर्ड (सातवाँ) आए थे. तो उन्हें भेट के तौर पर छत्रपती शिवजी महाराज की भवानी तलवार दी गई थी. हालाँकि अब यह तलवार महारानी एलिज़ाबेथ के महल में है.

७. अमरावती संगेमरमर कलाकृति-

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इन कलाकृतियों से दक्षिण-पूर्वी भारत में अमरावती स्तूपों से मुहाना सजाया जाता था. १८४५ के दौरान एक अधिकारी सर वॉल्टर इलियट के निगरानी में इन स्तूपों का उत्खनन किया गया था. १८८० के दशक के आस-पास करीबन १२० ऐसी कलाकृतियों को ब्रिटिश संग्रहालय ले जाया गया.

८. मध्यभारत की सरस्वती माँ की मूर्ति-

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भारत में विद्या की देवी के रूप में जाने जाने वाली सरस्वती माँ की मूर्ति लन्दन के संग्रहालय में मौजूद है. इतिहासकारों के अनुसार १८८६ के दौरान इस मूर्ति को ब्रिटिशों ने इस संग्रहालय में रखा.

तो ये थी भारत की कुछ ऐतिहासिक और बहुमूल्य वस्तुएँ जो विदेशों में कैद हैं.

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