भारत के राष्ट्रगान से पकिस्तान के सिन्ध शब्द को निकालों…!

जिस शब्द से हिंदुस्तान का जन्म हुआ अब उसे ही भारत के राष्ट्रगान से से अलग किये जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है. स्वतंत्र भारत में हम 24 जनवरी 1950 से राष्ट्रगान के रूप जिस ‘जन-गण-मन’ को गाकर हम देशभक्ति के भावों से ओत-प्रोत होते रहे है. मगर अब उसमें एक बार फिर संशोधन की मांग होने लगी है. जी हां अब देश के नेता चाहते है कि भारत के राष्ट्रगान से सिन्ध  देश को संबोधित करने वाले शब्द सिन्ध को हटा दिया जाय. यानि पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंग  पंक्ति से सिन्ध शब्द को हटा दिया जाय. हालांकि इसका विरोध भी बराबर किया जा रहा है. सिन्धी समाज में के लोग ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते.

राष्ट्रगान में नॉर्थ ईस्ट शब्द का हो प्रयोग

दरअसल कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने हाल ही में राज्यसभा में राष्ट्र गान को लेकर एक संशोधन की मांग करते हुए प्रस्ताव पेश किया है. उनके अनुसार राष्ट्रगान से सिंध शब्द को हटाकर इसमें ‘उत्तर पूर्व’ शब्द जोड़ा जाना चाहिए.

मीडिया खबरों के मुताबिक कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिंध आज भी राष्ट्रगान का हिस्सा है लेकिन अब देश का हिस्सा नहीं है. अब वह पाकिस्तान के दायरे में आता है और वह मुल्क हमेशा से भारत से दुश्मनी निभाते आया है.

इसलिए इस शब्द को हटाकर नॉर्थ ईस्ट शब्द को लगाना चाहिए. बोरा ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की तरह अब राष्ट्रगान में भी संशोधन किया जाना चाहिए.

अपने प्रस्ताव में बोरा ने लिखा कि देश के पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी, 1950 में कुछ शब्द और एक म्यूजिक सदन में पेश किया था, जिसे राष्ट्रगान कहा गया लेकिन वक्त के साथ हालात और नक्शा दोनों बदल गए हैं इसलिए अब राष्ट्रगान में संशोधन करने की आवश्यकता है.

प्रस्ताव में कहा गया है कि हमेशा भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पाकिस्तान के भूभाग (सिंध) के नाम को राष्ट्रगान से हटा देना चाहिए. इसके लिए बोरा ने अन्य दलों के सांसदों से भी बात की है और उनसे समर्थन करने की अपील भी की है.

पहले भी उठ चुकी है मांग 

बता दें कि शिवसेना ने भी वर्ष 2016 में इसी तरह की मांग उठाई थी. सांसद अरविंद सावंत ने ‘सिंध’ शब्द को राष्ट्रगान से हटाने की मांग करते हुए कहा था कि अब प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा है इसलिए इसे हटा देना चाहिए.

गौरतलब है कि जन गण मन राष्ट्रगान गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा 11 दिसंबर 1911  बंगाली भाषा में लिखा गया था. संविधान सभा ने जन-गण-मन हिंदुस्तान के राष्ट्रगान के रूप में २४ जनवरी १९५० को अपनाया था. इसे सर्वप्रथम २७ दिसम्बर १९११ को कांग्रेस के कलकत्ता अब दोनों भाषाओं में (बंगाली और हिन्दी) अधिवेशन में गाया गया था. मूल गीत में पांच पैरा हैं जिनमें से पहले पैरा को ही भारत के राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया गया है.

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