बड़े काम का है गूलर का पेड़

कहावतों कहनियों में अक्सर आपने सूना होगा गूलर के फूल के बारे में. सिर्फ गूलर का फूल ही कहावतों कहनी में ही सीमित नहीं बल्कि इसका पूरा पेड़ ही गुणकारी है जिसे आप शायद नहीं जानते होंगे. तो चलिए आपको बताते है गूलर के पेड़ के संपूर्ण महत्व के बारे में…!

गूलर का धार्मिक कार्यों में महत्व 

धार्मिक मान्यताओं के लिए दुनिया भर में मशहूर भारत देश में कई तरह के ऐसे पेड़ पैधे भी हैं जिनकी पूजा होती है, न सिर्फ पूजा बल्कि कई धार्मिक अनुष्ठानों में पेड़-पौधे और इनकी पत्तियों का खास महत्व भी होता है. इन्ही में से एक है गूलर का पेड़.

आम तौर पर इसे गूलर ही कहते हैं, लेकिन कुछ भाषओं में जैसे संस्कृत में उदुम्बर, बांग्ला में हुमुर, मराठी में उदुम्बर, गुजराती में उम्बरा, अरबी में जमीझ, फारसी में अंजीरे आदम कहते हैं. इसके आलावा बिहार में कुछ लोग गूलड़ कहते तो कुछ लोग गूलर कहते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में डूमर के नाम से इसकी अधिक पहचान है. इस पर फूल नहीं आते. इसकी शाखाओं में से फल उत्पन्न होते हैं. फल गोल-गोल अंजीर की तरह होते हैं और इसमें से सफेद-सफेद दूध निकलता है.

इस पेड़ के फल भालू के पसंदीदा भोजन में से एक हैं, जिसे वे बड़े ही चांव के साथ खाते हैं. इस दूर्लभ पेड़ की पहचान थोड़ी मुश्किल है, लेकिन इसके फल से आप इसे आसानी से पहचान सकते हैं. इसके फलों को तोड़ने पर इसके अंदर छोटे-छोटे कीड़े निकलते हैं. जिससे आप इसकी पहचान करते हैं. वैसे तो गूलर दो प्रकार का होता है. पहला नदी उदुम्बर और दूसरा कठूमर. कठूमर के पत्ते गूलर के पत्तों से बडे होते हैं. इसके पत्तों को छूने से हाथों में खुजली होने लगती है और पत्तों में से दूध निकलता है.

मांगलिक कार्यों में गूलर का महत्त्व 

इस पेड़ का महत्व पूजा-पाठ, शादी-विवाह और आयुर्वेद के लिए काफी मायने रखता है. शादी के दौरान गूलर के पेड़ की लकड़ियों और पत्तियों से विवाह के लिए मंडप तैयार किया जाता है. गूलर के पेड़ की लकड़ी से बने पाटे (पीढ़ा) पर बैठकर दूल्हा-दुल्हन के वैवाहिक रस्में संपन्न होती है.

ऐसे में जहां पेड़ या पत्तियां नहीं मिलती वहां इनके टुकड़ों का भी इस्तेमाल किया जाता है. यहीं कारण है कि विवाह के दौरान इस पेड़ का खास महत्व माना गया है. इस पेड़ में फल भी लगते हैं, जिसे कुछ लोग सब्जी के लिए प्रयोग में लगाते हैं, जबकि पकने पर भी खा सकते हैं. गूलर के पेड़ और इसके फलों को लेकर जानकारों-पंडितों का मनना है कि यह पेड़ अत्यंत शुभ है. पुराणों के अनुसार गूलर के पेड़ में गणेश जी का वास होता है.

पेड़ के पीछे प्रचलित कहनियां 

गूलर के पेड़ के पीछे एक कथा है. बताया जाता है कि एक ऋषि ने शादी के आयोजन में अपने अपमान के बदले गांधारी को श्राप दिया था, जिससे मुक्ति पाने के लिए गांधारी को गूलर की लकड़ी का मगरोहन बनाकर मंडप के फेरे लिए थे. ऐसा कहा जाता है कि इसके बाद से ही शादी में गूलर के पेड़ का खास महत्व रहने लगा.

हाल के दिनों में हिंदू धर्म के विवाह आयोजन में इसे परंपरा की तरह निभाया जा रहा है. जबकि इनकी लकड़ियों का इस्तेमाल हवन-पूजन के लिए भी किया जाता है. जानकारों के अनुसार, हवन में 9 तरह की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें एक डूमर भी मुख्य है. इनकी लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़े कर हवन कुंड में डाले जाते हैं और फिर हवन की आहुति होती है.

स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है गूलर का पेड़

इस पेड़ का फल मीठा होता है, जिससे कब्ज की परेशानी दूर हो सकती है, इसके साथ ही पेड़ की छाल, जड़, पत्ते, कच्चाफल सभी को उपयोग में लाया जा सकता है. पेड़ के फल आपके शरीर पर पौष्टिक आहार की तरह असर करता है.

गूलर के पत्ते खूनी बवासीर की समस्या में काफी लाभकारी उपाय है, इसके पत्तियों के रस के सेवन से अधिक फायदा होता है. इस पेड़ को कु कुरेदने पर दूध निकलता है जिसका इस्तेमाल हाथ-पैर की चमड़ी के कटने-फटने या दर्द के दौरान कर सकते हैं.

मुंह की कई तरह के बीमारियों में फायदेमंद होता है, इसका प्रयोग मुंह के छाले मसूड़ों से खून आना के साथ-साथ बदबू और कई तरह के समस्याओं में किया जाता है. गर्मी के मौसम के दौरान कई लोगों के शरीर के कुछ हिस्सों पर जलन की समस्या बढ़ने लगती है, जिससे बचने के लिए भी इसके पके हुए फल को पीस कर जलन वाले स्थान पर लगाने से काफी आराम मिलता है.

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