दुनियाँ के कई “विकसित” देश जहाँ अनैतिक संबंधों को आज भी अपराध माना जाता है!

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मनुष्य के जीवन में प्यार सर्वोपरे है. फिर यह प्यार उसे अपने माँ, बाप, भाई, बहन और बीवी के आलावा किसी और से भी प्राप्त हो तो वो इसके अधीन हो जाता है. मगर ऐसे रिश्तों को समाज हमेशा बुरा और अवैध मानता है, जो सामाजिक मान्यताओ के विपरीत होते है.

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हाल ही में इस संदर्भ में भारत के सर्वोच्च न्यायलय ने अनैतिक या विवाह के पश्चात् किसी और से संबंध कायम करने पर (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर) किसी भी तरह का कोई जुर्म नहीं ऐसा कानून स्थापित किया. इसके लिए सर्वोच्च न्यायलय ने करीबन १५० साल पुराने कानून को ख़ारिज कर डाला.

भारत ने इस कानून को स्थापित कर अब अपना नाम भी उन देशों की सूचि में दर्ज कर लिया है, जहाँ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बिलकुल जायज़ माना जाता है.

भारत के न्यायलय द्वारा बताया गया है कि-

बलिक या वयस्कों के बिच अगर किसी भी तरह का लैंगिक संबंध स्थापित हो तो उसके खिलाफ़ किसी भी प्रकार का गुनाह दर्ज करना उन बालिकों की गोपनीयता के अधिकारों का उल्लंघन करने के बराबर है.

इतिहास को मद्देनज़र रखते हुई कई संस्कृतियों में ऐसे संबंधों को बड़ा गुनाह माना गया है. ऐसा संबंध रखने वाले स्त्रियों और पुरषों को मृत्युदंड, उत्पीड़न आदि शिक्षाओं का सामना करना पड़ता था.

संयुक्त राष्ट्र ने ऐसे संबंधों के प्रती दर्ज किए जाने वाले सारे कानून को रद्द करने के लिए कई देशों के सरकारों को कई पत्र भेजे. मानवाधिकार विशेषज्ञ फ्रांसेस रेडय के अनुसार, “ऐसे गुनाहों में स्त्रियों और पुरषों को समान दंड नहीं दिया जाता, बल्कि महिलाओं के लिए कठोर नियम और बंधन लागू किए जाते हैं.”

इस पृष्ठभूमि पर भारतीय न्यायलय द्वारा लिए गए इस नए निर्णय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा ही सराहा गया है.

मगर दुनियाँ में आज भी ऐसे कई विकसित देश हैं, जहाँ ऐसे संबंधों को गैरकानूनी माना जाता है. कई देशों में ऐसे गुनाहों के लिए उस देश के कानून के अनुसार शिक्षा प्रधान की जाती है.

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कई यूरोपियन देशों में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को गुनाह माना जाता था और उन से जुड़े कई कानून भी थे. मगर अधिकांश कायदों को १९७० और १९८० के दशक में रद्द कर दिया गया था. तो वही २००६ में ऑस्ट्रिया और १९९७ में रोमानिया जैसे यूरोपियन देश आखरी थे जहाँ इन कायदों को रद्द कर दिया गया था.

अधिकांश कम्युनिस्ट देशों में ऐसे संबंधों को गुनाह नहीं माना जाता था. रोमानिया एक ऐसा देश था जहाँ २००६ तक ऐसे संबंधों को अपराध माना जाता था, हालांकि, किसी भी यूरोपीय देश में व्यभिचार अब अपराध नहीं है.

इटली में १९६९, माल्टा में १९७३, लक्समबर्ग यहाँ १९७४, फ्रांस में १९७५, स्पेन इस देश में १९७८, पोर्तुगाल में १९८२, ग्रीस इस देश में १९८३ इस साल में, बेल्जियम में १९८७, स्विजरलैंड में १९८९ और ऑस्ट्रिया में १९९७ इन सालों के दौरान इन देशों से इस कानून को रद्द कर दिया गया था.

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अमरिका में भी २१ राज्यों में, व्यभिचार अभी भी क़ानूनी तौर पर अवैध है.

न्यूयॉर्क समेत कई राज्यों में अपने जीवनसाथी के साथ धोखा करना अस्वीकार्य माना जाता है.

लेकिन यह इडाहो, मैसाचुसेट्स, मिशिगन, ओक्लाहोमा और विस्कॉन्सिन में इसे एक दंडनीय अपराध माना जाता है और इसके लिए कठोर शिक्षा के रूप में जेल भी भेजा जा सकता है.

दक्षिण कोरिया में भी कुछ ऐसे ही हालात थे. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, २००८ और २०१५ के दौरान जब इस कानून का अंत किया गया तब ५,५०० से अधिक लोगों ने अपने साथी को धोखा देने के आरोप में सफलतापूर्वक कार्रवाई की थी.
पूर्वी एशिया के ताइवान और फिलीपींस में व्यभिचार अब भी अवैध माना जाता है.

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टर्की में व्यभिचार कानून १९९६ तक अवैध माना जाता था. इस कानून के चलते पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर किया जाता था, जिसके कारण इस कानून के भेदभाव करने वाला कानून माना जाता था. २००४ में, लिंग-निष्पक्ष व्यभिचार कानून लागू करने का प्रस्ताव किया गया था. लेकिन उसका विरोध किया गया. वहाँ भी मौत की सजा लागू की गई थी. ये तो बात हो गई तथाकथित सेक्युलर देशों की..

लेकिन मुस्लिम शासित देशों में, स्थिति बहुत अलग है.

सऊदी अरब, पाकिस्तान और सोमालिया समेत इस्लामी कानून को नियंत्रित करने वाले सभी देशों में, “व्यभिचार” का निषेध किया जाता है. और इसे इस्लामी कानून के मुताबिक इसे ‘जिना’ कहा जाता है.

इस तरह के मामले का अदालत में मुकदमा चलना आम बात है. इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर नकद अपराध, अनियंत्रित कारावास और मृत्युदंड जैसी शिक्षाओं का समावेश हो सकता है.

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ऐसे देशों में काम करने वाले मानवाधिकारियों का मानना है, कि बहोत से ऐसे इस्लामिक देशों में महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना घटती है, और इस के चलते महिलाओं पर ही व्यभिचार के कायदा का विपरीत इस्तेमाल किया जाता है. अर्थात इस कायदे का इस्तेमाल इन देशों में सर्वाधिक रूप से महिलाओं के खिलाफ ही किया जाता है. और ये एक दर्दनाक सत्य है.

पाकिस्तान में व्यभिचार ये १९७९ के दौरान लाए गए हुडुद अध्यादेश के अंतर्गत अपराध माना जाता है.

इस अध्यादेश के अनुसार इस गुनाह के लिए सबसे बड़ा दंड मृत्युदंड है. वैसे तो ये एक विवादास्पद अध्यादेश रहा है. बलात्कार करने का आरोप करने वाली पीड़ित महिला का ही व्यभिचार सिद्ध करने के खतरे का सामना करना पड़ता है. इस खतरे को टालने के लिए पक्के सबूत पेश करना अति आवश्यक है.

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फिलीपींस में, ये कानून महिला या पुरुष इस पर आधारित है. पत्नी पर किसी दूसरे पुरुष के साथ यौन संबंध बनाने के लिए व्यभिचार का आरोप लगाया जा सकता है, लेकिन पति पर घरेलू व्यभिचार का आरोप लगाया जा सकता है.

वर्तमान में फिलीपींस में अनैतिक संबंधों से जुड़े कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया है.

ऑस्ट्रेलिया में, व्यभिचार कोई अपराध नहीं है. १९९४ में लागु किए गए फेडरल कायदे के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के वयस्क (१८ वर्ष या अधिक आयु) अपने इच्छा से (वैवाहिक स्थिति की परवाह किए बिना) अगर एक दूसरे के साथ यौन संबंध स्थापित करते हैं तो उसे गुनाह नहीं बल्कि उनका निजी मामला बताया जाता है.

१९७५ में ऑस्ट्रेलिया ने तलाक के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले व्यभिचार के कायदे को रद्द कर दिया.

आज भी ऐसे कई देश हैं जहाँ अनैतिक संबंधों को स्थापित करना गुनाह माना जाता है.

ऐसे देशों में शिक्षा दी जाती है, या मृत्युदंड. २०वीं सदी के बाद अनैतिक संबंधों के गुनाह से जुड़े कानून को लेकर विवाद की शुरुआत हुई. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ इन्हे रद्द करने की मांग पर ज़ोर दाल रही हैं.

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