एक ऐसा शासक जिसकी कब्र ढूंढ रही है दुनिया, इंसानों में मिलता है DNA

दुनियाभर में जितने भी बड़े महाराजा, सुल्तान या बादशाह रहे उनके मरने के बाद भी मक़बरों की शक्ल में उनके निशान बाक़ी रहे. ये मक़बरे शायद इसलिए बनाए गए क्योंकि वो चाहते थे कि लोग उन्हें हमेशा याद रखें. लेकिन हैरत की बात है कि तलवार की नोक पर एशिया के एक बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा करने वाले चंगेज़ ख़ान का कोई मकबरा या कब्र दुनिया में नहीं है. बता दें कि चंगेज खान ने अपने लिए एक अजीब वसीयत बनवाई थी. जिसके मुताबिक वो नहीं चाहता था कि उसके मरने के बाद उसका कोई निशान बाक़ी रहे. फिर आखिर चंगेज खान की कहाँ गयी कब्र. जो आज भी रहस्य बना है. जिसे जमीन से ही नहीं असमान से भी तलाशा जा रहा है.

चंगेज खां  (तेमूचिन)

Genghis_Khan kuchhnaya

अपने जीवन हक़ की पहली लड़ाई लड़ने वाला मंगोलियाई शासक चंगेज खां का वास्तविक  नाम तेमुजिन (तेमूचिन) था. जो बौध धर्म को मानने वाला था इसके अलावा वो किसी धर्म को नहीं मानता था. जिसने अपने जीवन काल में बड़ी लड़ाईयां लड़ी. 12 वर्ष की आयु में चंगेज की शादी बोरते के साथ कर दी गई थी जिसका बाद में अपहरण हो गया था. अपनी पत्नी को छुड़ाने के लिए चंगेज को लड़ाइयां लड़नी पड़ी थीं. उसके एक खास दोस्त का नाम बोघूरचू था. उसका सगा भाई जमूका भी उसके साथ ही रहता था. जमूका हालांकि प्रारंभ में उसका मित्र था, बाद में वो शत्रु बन गया. कबीलों की लड़ाई में उसके पिता की हत्या कर दी गई. बाद में चंगेज खान ने जमूका को हरा दिया और फिर शुरू हुआ उसके द्वारा सभी कबीलों के अपने अधीन करने का अभियान इसके बाद मंगोलिया से लेकर यूरोप तथा एशिया के कई हिस्सों पर उसने आक्रमण किया तथा वहां अपना साम्राज्य स्थापित किया.

चंगेज के कहर से बच गया भारत

chengej-khan kuchhnaya

सन 1211 और 1236 ई. के बीच भारत की सरहद पर एक बड़ा भंयकर बादल उठा. यह बादल मंगोलों का था, जिसका नेता चंगेज़ ख़ाँ था. चंगेज़ ख़ाँ अपने एक दुश्मन का पीछा करता हुआ ठेठ सिंधु नदी तक आया था. वह सिंधु नदी से आगे नहीं बढ़ा और वहीं पर रुक गया, जिससे उसके द्वारा होने वाली सम्भावित बर्बादी से भारत बच गया.

चंगेज खान की वसीयत

चंगेज खान ने अपने साथियों को आदेश दिया था कि उसके मरने के बाद उसे किसी गुमनाम जगह पर दफ़नाया जाए. वसीयत के मुताबिक़ ऐसा ही किया गया. सैनिकों ने उसे दफ़नाने के बाद उसकी क़ब्र पर क़रीब एक हज़ार घोड़ों को दौड़ाकर ज़मीन को इस तरह से बराबर कर दिया ताकि कोई निशान बाक़ी ना रहे.

आसमान से तलाशी जा रही कब्र

मंगोलिया के रहने वाले चंगेज़ ख़ान की मौत के बाद आठ सदियां बीत चुकी हैं. इसे लेकर तमाम मिशन चलाए गए, लेकिन उसकी क़ब्र का पता नहीं चला. नेशनल जियोग्राफ़िक ने तो वैली ऑफ़ ख़ान प्रोजेक्ट के तहत सैटेलाइट के ज़रिए उसकी क़ब्र तलाशने की कोशिश की जा रही है.

कब्र खुली तो बन सकती है तबाही का कारण

चंगेज खान का मंदिर

दिलचस्प बात ये है कि चंगेज़ ख़ान की क़ब्र तलाशने में विदेशी लोगों की ही दिलचस्पी थी. मंगोलिया के लोग चंगेज़ ख़ान की क़ब्र का पता लगाना नहीं चाहते इसकी बड़ी वजह एक डर भी है. कहा जाता रहा है कि अगर चंगेज़ ख़ान की क़ब्र को खोदा गया तो दुनिया तबाह हो जाएगी. लोग इसकी मिसाल देख भी चुके थे.

कहा जाता है कि 1941 में जब सोवियत संघ में, चौदहवीं सदी के तुर्की- मंगोलियाई शासक तैमूर लंग’ की क़ब्र को खोला गया तो नाज़ी सैनिकों ने सोवियत यूनियन को खदेड़ डाला था. इस तरह सोवियत संघ भी दूसरे विश्व युद्ध में शामिल हो गया था. इसीलिए वो नहीं चाहते थे कि चंगेज़ ख़ान की क़ब्र को भी खोला जाए.

taimur ka kabr kuchhnaya
जो लोग चंगेज़ ख़ान की क़ब्र तलाशने के ख़्वाहिशमंद थे उनके लिए ये काम आसान नहीं. चंगेज़ ख़ान की तस्वीर या तो पुराने सिक्कों पर पाई जाती है या फिर वोदका की बोतलों पर। बाक़ी और कोई ऐसा निशान नहीं है जिससे उन्हें मदद मिली हो.

मंगोलिया में प्रचलित क़िस्सों के हिसाब से चंगेज़ ख़ान को ‘खेनती’ पहाड़ियों में बुर्ख़ान ख़ालदुन नाम की चोटी पर दफ़नाया गया था. स्थानीय क़िस्सों के मुताबिक़ अपने दुश्मनों से बचने के लिए चंगेज़ ख़ान यहां छुपा होगा और मरने के बाद उसे वहीं दफ़नाया गया होगा। हालांकि कई जानकार इस बात को नहीं मानते.

इंसानों में मिलता है चंगेज का DNA

DNA kuchhnaya

चंगेज खान के मरे हुए सालों बीत गए. लेकिन आज भी इंसानों कि दीमक में उसकी खौफ और DNA (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल) मौजूद है. वर्ष 2003 में एक जेनेटिक अध्ययन में सामने आया था कि पूरे यूरेशियाए लोगों के एक विशेष वर्ग में एक साझा डीएनए पैटर्न है. इस अध्ययन के अनुसार यूरेशिया के 16 समूहों के 8 प्रतिशत लोगों में यह पैटर्न पाया जाता है जिसका अर्थ है कि यूरेशिया में लगभग 1 करोड़ 60 लाख लोग एक ही डीएनए पैटर्न के हैं जिसका सीधा-सा अर्थ है कि वे किसी एक ही गोत्र का हिस्सा हैं. अध्ययन करने वाले इसकी और गहराई में गए तो पता चला कि यह पैटर्न मंगोलिया के चंगेज खान के डीएनए पैटर्न से मिलता है. इसका अर्थ है कि एक समय चंगेज खां का इतना व्यापक प्रभाव रहा होगा कि वह पूरे यूरेशिया में लोगों के डीएनए पैटर्न को बदलने में सक्षम था

पाश्चात्य विज्ञानियों का मानना है कि चंगेज जहां जाता होगा वहां वह केवल स्त्रियों के साथ संबंध बनाता फिरता रहा होगा, क्योंकि डीएनए संरचना जन्मजात होती है और उसमें बाद में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किया जा सकता. दूसरी बात यह है कि यूरोप और मध्य-पूर्व में विशेषकर ईसाई और मुस्लिम पंथ के क्रूसेडर और जिहादी युद्ध में स्त्रियों को कब्जाने और उन्हें दासी बनाकर अपने मनोरंजन के प्रयोग करने का काम करते रहे हैं. इसलिए उन्होंने यही बात चंगेज के लिए भी सोच ली कि वह भी ऐसा ही करता रहा होगा. इसलिए यूरेशिया के हर 200 पुरुषों में से 1 पुरुष का डीएनए पैटर्न चंगेज खान से मिलता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *