भारत के संसद भवन में है पौराणिक शिव मंदिर की झलक

ये कहानी है चंबल की, जहां दशकों तक डाकुओं और बागियों की हुकूमत चली, यहां कई ऐसे इलाके हैं जहां आम इंसान तो क्या, पुलिस के कदम भी नहीं पड़े, लेकिन बागियों का राज खत्म हुआ तो चंबल में कुछ ऐसे रहस्य सामने आए जिनपर यक़ीन करना बहुत मुश्किल था। यहां महादेव शिव का एक ऐसा संसार छिपा था, जिसका ज़िक्र शिव पुराण में भी हुआ। दावा होता है कि वहां देश की पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों की भविष्यवाणी पहले ही हो चुकी थी। सबसे ज्यादा हैरानी उस शिव धाम को देखकर हुई, जिसकी इमारत हूबहू देश की संसद से मेल खाती है तो आज चलिए जानते है भगवान भोलेनाथ के मंदिर से संसद भवन का नाता….!

chausathi temple kuchhnaya

हर मंदिर अपनी परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं. मंदिर में देवी-देवताओं का निवास होता जिससे करोड़ों भक्तों की आस्था जुड़ी रहती है. इतना ही नहीं मंदिर की अपनी कलाकृति और संरचना होती है, जिससे कई लोग आकर्षण होते हैं. वैसे हमारे देश में कई मंदिर है लेकिन कुछ मंदिर अपनी खास विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं. ऐसा ही एक भगवान शिव का मंदिर है जिसके बारे में जानकर थोड़ा हैरान हो जाएंगे. दरअसल, दूर से देखने पर भगवान शिव का यह मंदिर, मंदिर नहीं बल्कि भारतीय संसद की तरह लगेगा. भगवान शिव का यह अद्भुत मंदिर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है.

चौसठ योगिनी नाम से प्रसिद्ध है मंदिर

64 yogini temple, hirapur kuchhnaya
भारतीय संसद आकार का बना यह मंदिर ग्वालियर से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर मितावली में स्थित है. भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर हु-ब-हु भारतीय संसद की तरह दिखता है. इस मंदिर का नाम चौसठ योगिनी मंदिर है. इस मंदिर में 101 खंभे और 64 कमरे हैं जिसके हर खंभे में शिवलिंग है. मंदिर के मुख्य परिसर में एक बड़ा शिवलिंग स्थापित है. इतना ही नहीं कमरे में शिवलिंग के साथ देवी योगिनी की मूर्ति भी स्थापित दिखाई देत थी, लेकिन अब इन्हें दिल्ली के संग्रहालय में रख दिया गया है. इसीलिए इस मंदिर का नाम चौसठ योगिनी पड़ा। माना जाता है कि करीब 1200 साल पहले 9वीं सदी के पास प्रतिहार वंश के राजाओं ने इस मंदिर को बनवाया था.

इस मंदिर में 101 खंभे और 64 कमरे हैं जिसके हर खंभे में शिवलिंग है. जबकि संसद भवन 6 एकड़ में फैला हुआ है जिसमें 12 दरवाजे और 27 फीट उंचे 144 खंभे कतारबद्ध है. जिसका व्यास 560 फुट और जिसका घेरा ५३३ मीटर है. इसके निर्माण में 1927 में 83 लाख रुपए की राशि खर्च हुई थी.

मंदीर में है एक सुरंग जो महल से जुडती है 

Queen Durgavati Fort kuchhnaya

मंदिर के सैनटोरियम में “रानी दुर्गावती” की मंदिर की यात्रा से संबंधित एक शिलालेख भी देखा जा सकता है. यहां एक सुरंग भी है जो “चौंसठ योगिनी मंदिर” को गोंड रानी दुर्गावती के महल से जोड़ती है. यह मंदिर एक विशाल परिसर में फैला हुआ है और इसके हर एक कोने से भव्यता झलकती है. बेशक, अगर आप जबलपुर जा रहे हैं तो यह मंदिर जरूर जाएं.

वर्तमान में मंदिर के अंदर भगवान शिव व मां पार्वती की नंदी पर वैवाहिक वेशभूषा में बैठे हुए पत्थर की प्रतिमा स्थापित है. मंदिर के चारों तरफ़ करीब 10 फुट ऊंची गोलाई में चारदीवारी बनाई गई है, जो पत्थरों की बनी है तथा मंदिर में प्रवेश के लिए केवल एक तंग द्वार बनाया गया है. चारदीवारी के अंदर खुला प्रांगण है, जिसके बीचों-बीच करीब 2-3 फुट ऊंचा और करीब 80-100 फुट लंबा एक चबूतरा बनाया गया है. चारदीवारी के साथ दक्षिणी भाग में मंदिर का निर्माण किया गया है. मंदिर का एक कक्ष जो सबसे पीछे है, उसमें शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित है. इसके आगे एक बड़ा-सा बरामदा है, जो खुला है. बरामदे के सामने चबूतरे पर शिवलिंग की स्थापना की गई है, जहां पर भक्तजन पूजा-पाठ करवाते हैं.

तांत्रिक विश्वविद्यालय के लिए जाना जाता है मंदिर

Tantrik university kuchhnaya

चौंसठ योगिनी मंदिर 1000 साल है पुराना एक ऐसा मंदिर है जिसे भक्त तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी के नाम से जानते है. सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थापित जिले के शिवमंदिरों में से एक मितावली का चौंसठ योगिनी मंदिर तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि तंत्रमंत्र विद्या में यकीन रखने वाले लोग दीपावली,होली, दशहरा व शिवरात्रि पर सिद्धि प्राप्त के लिए यहां विशेष साधना करते हैं.
स्थानीय लोग इस मंदिर को तांत्रिक विश्वविद्यालय के नाम से भी जानते हैं. तांत्रिक कर्मकांड के लिए लोग यहां आधी रात को आते हैं. इस तांत्रिक मंदिर के लिए मान्यता है कि यहां भारतीयों से ज्यादा विदेशी पर्यटक आते हैं. विदेशियों को यहां स्थानीय तांत्रिकों के साथ पूजा करते देखा जाता है. ये पर्यटक अपने अनुष्ठान के पूरा होने तक स्थानीय ग्रामीण इलाकों में रहते हैं.

भारत में चार चौसठ योगिनी मंदिर है. दो मंदिर मध्य प्रदेश में है तो दो आंध्र प्रदेश में हैं. योगाभ्यास करने वाली स्त्री को योगिनी कहा जाता है लेकिन तांत्रिक परंपराओं में योगिनी देवीरुपा मानी जाती हैं जो सप्तमातृकाओं से सम्बद्ध हैं. योगिनी मां काली का अवतार मानी जाती हैं. घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने ये अवतार लिए थे. ये भी माना जाता है कि ये सभी माता पार्वती की सखियां हैं.

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