भारत का सबसे पावर फुल है ये रेल इंजन जानिए और क्या है खास ?

भारत के रेलमंत्रालय विभाग ने फ़्रांस के साथ मिलकर एक ऐसे रेल इंजन का निर्माण किया है जिसकी कई खासियतें भारतीय रेल सेवा की कई समस्याओं से निजाद दिलाएगी. तो चलिए हम आपको बताते है इस ख़ास इंजन के बारे में…

फ़्रांस से हुआ रेलवे का करार

मीडिया ख़बरों के मुताबिक बिहार के मधेपुरा में 12000 हॉर्सपावर (एचपी) के बिजली के रेल इंजन निर्माण के लिए नवंबर 2015 में कारखाना को लेकर भारत व फ्रांस के बीच करार हुआ था. जिसके तहत 20 हजार करोड़ रुपये की परियोजना के अंतर्गत 11 वर्षों की अवधि में कुल 800 उन्नत हॉर्स पावर रेल इंजन बनने का लक्ष्य रखा गया है. 12 हजार हाॅर्स पावर की क्षमता वाले इंजन ट्रेन को 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने में सक्षम होंगे. ज्ञात हो कि यह रेल विभाग में पहला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एफडीआइ है. इस प्रोजेक्ट में फ्रांस की मल्टीनेशनल कंपनी एल्सटॉम की 74 फीसदी और इंडियन रेलवे की 26 फीसदी हिस्सेदारी है.

प्रधानमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर देश किया समर्पित 

भारत और फ़्रांस किस करार के बाद अब भारतीय रेलवे के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गयी है. रेलवे ने देश का पहला 12 हजार हॉर्स पावर का बिजली से चलने वाला रेल इंजन तैयार कर लिया है. इस इंजन को बिहार राज्य के चकला स्थित रेल इंजन कारखाने में बनाया गया है. पूर्व तय कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इसके साथ ही रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी व स्वीडन सहित उन देशों की श्रेणी में भारत शामिल हो गया जिनके पास 12,000 एचपी या इससे ज्यादा की क्षमता वाला बिजली रेल इंजन है.

माल ढुलाई की बढ़ेगी रफ़्तार 

भारतीय रेल के पास अब तक सबसे ज्यादा क्षमता वाला 6,000 एचपी का रेल इंजन रहा है. जिसकी अधिकतम रफ़्तार 120 किलोमीटर प्रतिघंटा है. भारी ढुलाई करने में सक्षम यह नवनिर्मित रेल इंजन मालगाड़ियों की रफ्तार व उनके माल ढुलाई की क्षमता में सुधार करेगा. इसके साथ ही फ्रांसीसी कंपनी ऑल्सटाम के निवेश के साथ संयुक्त उद्यम से बना मधेपुरा का यह रेल इंजन कारखाना भी पीएम मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. 20 हजार करोड़ रुपये की परियोजना के अंतर्गत 11 वर्षों की अवधि में कुल 800 उन्नत हॉर्स पावर रेल इंजन बनने की उम्मीद है.

मधेपुरा में 11 सालों में बनेंगे 800 इंजन 

ख़बरों के मुताबिक मधेपुरा का लोकोमोटिव फैक्ट्री रेल क्षेत्र में पहला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट में फ्रांस की मल्टीनेशनल कंपनी एल्सटॉम की 74 फीसदी और इंडियन रेलवे की 26 फीसदी हिस्सेदारी है. 250 एकड़ में बनी फैक्ट्री के लिए एल्सटॉम ने 1200 करोड़ रुपए का निवेश किया है.

एल्सटॉम के मुताबिक, फैक्ट्री की क्षमता हर साल करीब 120 इंजन बनाने की है. आने वाले 11 साल में यहां 800 इंजन बनेंगे, जो भारतीय रेल सेवा में शामिल होंगे. मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री में 2019-20 में करीब 35 और 2020-21 में 60 इंजन बनेंगे. इसके बाद यह फैक्ट्री हर साल करीब 100 इंजन बनाएगी और 11 साल में 800 रेल इंजन बनाने के अपने टारगेट को पूरा करेगी.

800 इलेक्ट्रिक रेल इंजन बनाने वाले मधेपुरा रेल कारखाना से तैयार एक इंजन की लागत करीब 25 करोड़ रुपये बतायी गयी है. इन इंजनों के रखरखाव के लिए सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) व नागपुर (महाराष्ट्र) में दो रेल इंजन रखरखाव डिपो स्थापित की गयी है. इस परियोजना को तैयार करने के लिए रेलवे द्वारा कुल 1,300 करोड़ रुपये खर्च किये गये है. मधेपुरा में तैयार इलेक्ट्रिक इंजन को इन्हीं डीपों में रखने की व्यवस्था की गयी है.

कुहासे में रफ्तार नहीं होगी कम 

मधेपुरा रेल इंजन कारखाना में तैयार इस इंजन की खास बात है कि इसकी रफ्तार कुहासे में भी कम नहीं होगी. अभी देश में छह हजार हाॅर्स पावर के इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जो महज लगभग 50 किलोमीटर की गति से ही बोगी को खींच पाती है. यहां बनने वाले इंजन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी को खींचेगी. इन इंजनों की क्षमता 12 हजार हाॅर्स पावर होगी. इससे ये इंजन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी के साथ दौड़ेगी. साथ ही ऐसे तकनीक से लैस होगी, जिससे कुहासे में भी स्पीड कम नहीं होगी. इससे कम समय में सामान एक जगह से दूसरे जगह पहुंच जायेगा. अभी अभी माल ढुलाई और पहाड़ी इलाकों में चलने वाली कई पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए दो-दो इंजनों का इस्तेमाल करना पड़ता है.

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