क्या आपको लगता है के आईपीएल २०१७ फाइनल मैच फिक्स थी? – सच्चाई पढिये!

आईपीएल २०१७ का फायनल मुकाबला बेहद रोमांचक था और राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने केवल एक रन से मैच अपने हाथों से गँवादी और मुंबई इंडियंस ने मैच में वापसी करते हुए आईपीएल २०१७ का ख़िताब जीता. इस फाइनल से पहले इस संस्करण में पुणे, मुंबई को तीन बार हरा चुकी है और फायनल में प्रवेश करने से रोका था और पुणे ने फायनल में प्रवेश किया.

फायनल मैच में फिर एक बार मुंबई की टीम के साथ भिडंत हुई और पुणे ने पूरी कोशिश करते हुए मुंबई को १२९ रन्स  पर रोका.  पुणे के सामने जीत के लिए १३० रनों का लक्ष्य था. महेंद्रसिंग धोनी जैसे मैचविनर खिलाडी टीम में शामिल होने की वजह से आख़िरकार जीत पुणे टीम को ही हासिल होगी ऐसी उम्मीद थी. इस आसां लक्ष्य का पीछा करते हुए पुणे टीम ने धीरे धीरे हाथों से मैच गँवादी. मुंबई इंडियंस ने पुणे सुपरजायंट को केवल १ रन से हरा दिया और इसी कारण शक की सुइय्या मैचफिक्सिंग की तरफ इशारा कर रहीं थी. मुंबई की जीत पहले से तय थी, पुणे टीम हार गयी, अम्बानी के पैसे लगे थे, ऐसे आरोप हो रहें हैं. लेकिन क्या आपको लगता है कि पूरा मैच फिक्स होना संभव है? तो आपको हम बताना चाहते है कि यह असंभव है.

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मैच का कोई खिलाडी फिक्सिंग में शामिल हो सकता है परन्तु पूरा मैच फिक्स नहीं हो सकता. स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग में बेहद अंतर है. आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के कई मामले सामने आये थे और उन दोषी खिलाडियों को सजा भी हुई थी. एक-दो खिलाडी फिक्सिंग में शामिल होना मुमकिन है पर पूरा मैच फिक्स करना कठिन है, पूरा मैच फिक्स करने के लिए २२ खिलाडी, अम्पायर और सारी चीजों का प्रबंध करना पड़ेगा.

कई लोगों का कहना है कि, डब्लूडब्लूई की तरह आईपीएल मैचेस स्क्रिप्टेड होते हैं लेकिन गेंदबाज कितना भी अभ्यास कर लें वह एक जगह पर सारी गेंदे नहीं डाल सकते और इसी तरह बल्लेबाज भी अभ्यास करके अपनी कैच नहीं थमा सकता हमें यह समझना होगा और इसलिए क्रिकेट को अनिश्चितता का खेल कहाँ जाता है.

कोई खिलाडी फिक्सिंग में शामिल है तो वह जान बुझकर अपनी विकेट थमाते है या कैचेस छोड़ देते है यदि पूरा मैच फिक्स हो तो सारे खिलाडीओं के बर्ताव से प्रेक्षक खुद ही समझ जायेंगे. बुकीज या फिक्सर भी पूरा मैच फिक्स नहीं करते बल्कि एकाध ओव्हर फिक्स करते हैं. यहाँ तक की बुकीज पीच तैयार करनेवाले ग्राउंड स्टाफ को पैसे देकर जिस टीम को जीताना है उस हिसाब से पीच तैयार करवाते हैं, ऐसी अफवाएं आजकल उडती हैं. लेकिन खिलाडियों को इस बात की जानकारी नहीं होती और वे पीच पर खेलने उतरते हैं और टीम सपोर्ट होते हुए भी उन्हें हार का सामना करना पड़ता है और उनपर मैच फिक्सिंग के आरोप लगते हैं.

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आईपीएल टीम्स में कई स्टार खिलाडी शामिल हैं, जो अपने काबिलियत के बल पर आगे आये हैं. इसी खेल ने उन्हें मालामाल कर दिया. इसी वजह से चंद रुपयों के लालच में आकर अपनी शोहरत दांव पर नहीं लगा सकते. कुछ खिलाडी पैसों के लिए अपनी निष्ठा बेचना संभव हैं और विरोधी टीम को जीत के नजिक पहुंचाते हैं.

आईपीएल २०१७ में शायद स्पॉट फिक्सिंग हुई होगी किन्तु इस वजह से प्रेक्षकों ने खेलने वाली टीम्स को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा. इन मैचेस के दौरान लाजवाब कैचेस को आप याद कीजिये. ये सभी कैचेस अगर मैच फिक्सिंग का हिस्सा है तो आपके सामने नतमस्तक होना पड़ेगा. कई बार कैचेस लेते समय खिलाडी अपना फिटनेस दांव पर लगाते हैं.

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अनिश्चितता के इस खेल में कैच पकड़कर या छोडकर खेल के सारे गणित बदल सकतें हैं. ये सभी बातें बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण पर लागु होती हैं.

अपनी टीम के लिए पूरी निष्ठा से खेलने वाले खिलाडी को केवल हार की वजह से फिक्सिंग का आरोप यकीनन आहत करता होगा. जीत की ख़ुशी खिलाडीओंके चेहरे पर दिखती हैं, और हार का गम, गहरी निराशा हारे हुए खिलाडीओंके के चेहरे पर दिखती हैं. अगर कोई इसे एक्टिंग कहता होगा तो ये सभी खिलाडी क्रिकेट खेलने के बजाय एक्टिंग करना पसंद करते. सालों कड़ी मेहनत करना नहीं चुनते. ऐसे कई उदाहरन हम दे सकतें है. आईपीएल का फोर्मेट फ़ास्ट क्रिकेट है इसलिए मुकाबले दिलचस्प होते हैं और अंतिम गेंद तक खेल में रोमांच बना रहता है और प्रेक्षकों के बीच में मैच फिक्सिंग की चर्चा होती है, अब मन की सारी शंकाएं मिटा दीजिये क्यूंकि स्पॉट फिक्सिंग संभव हैं पर मैच फिक्सिंग नामुमकिन हैं.

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क्रिकेट के चाहने वालों ने चौके, छक्के या हर गेंद का लुफ्त उठाना चाहिए. खिलाडीओं का होसला बढ़ाना चाहिए ताकि खिलाडी खेलते समय अपनी जी जान लगाकर खेल सकें और मनोरंजन से भरे हुए इस खेल से हमारा लगाव बना रहें. २- ३ खिलाडीओं के कारण पूरी टीम को मैच फिक्सिंग में शामिल होने का आरोप न लगायें.

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