डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर इस फसल की खेती से कमाता है लाखों

आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जिसने पढ़ाई छोड़कर वो कारनामा कर दिखाया है जो बेहद ही मुश्किल था. कहानी महाराष्ट्र के जलगांव की है जहां एक युवक ने डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर केवल ठंडे मौसम में फलने-फूलने वाली केसर की फसल को महाराष्ट्र के जलगांव जैसे गर्म इलाके में उगाकर लोगों को हैरत में डाल दिया है. हम आपके लिए उसी के इस कारनामे की कहानी लेकर आये है.

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27 साल के संदेश पाटिल ने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर अपने जिद्द के बलबूते अपने खेतों में केसर की खेती करने की ठानी. ठंडे मौसम में फलने-फूलने वाली केसर की फसल को महाराष्ट्र के जलगांव जैसे गर्म इलाके में उगाकर लोगों को चौका दिया है.अब वे हर महीने लाखों का मुनाफा भी कमा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने लोकल और ट्रेडिशनल फसल के पैटर्न में बदलाव किया.

केशर की खेती के लिए इंटरनेट से ली मदद 

जलगांव जिले के मोरगांव खुर्द में रहने वाले 27 साल के संदेश पाटिल ने मेडिकल ब्रांच के बीएएमएस में एडमिशन लिया था, लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा. उनके इलाके में केला और कपास जैसी लोकल और पारंपरिक फसलों से किसान कुछ खास मुनाफा नहीं कमा पाते थे.

इस बात ने संदेश को फसलों में एक्सपेरिमेंट करने के चैलेजिंग काम को करने को प्रेरित किया. इसके बाद उन्होंने सोइल फर्टिलिटी की स्टडी की. उन्होंने मिट्टी की उर्वरक शक्ति (फर्टिलिटी पावर) को बढ़ाकर खेती करने के तरीके में एक्सपेरिमेंट करने की सोची. इसके लिए उन्होंने राजस्थान में की जा रही केसर की खेती की जानकारी इंटरनेट से ली.

घर वाले थे उनके खिलाफ

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सारी जानकारी जुटाकर संदेश ने इस बारे में अपनी फैमिली में बात की. शुरुआत में उनके परिवार में उनके पिता और चाचा ही उनके खिलाफ थे. लेकिन संदेश अपने फैसले पर कायम रहे. आखिरकार उनकी जिद और लगन को देखते हुए घरवालों ने उनकी बात मान ली.
इसके बाद उन्होंने राजस्थान के पाली शहर से 40 रुपए के हिसाब से 9.20 लाख रुपए के 3 हजार पौधे खरीदे आैर इन पौधों को उन्होंने अपनी आधा एकड़ जमीन में रोपा.
संदेश ने अमेरिका के कुछ खास इलाकों और इंडिया के कश्मीर घाटी में की जाने वाली केसर की खेती को जलगांव जैसे इलाकों में करने का कारनामा कर दिखाया है.

दूसरे किसान भी ले रहे दिलचस्पी

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संदेश पाटिल ने अपने खेतों में जैविक खाद का इस्तेमाल किया. मई 2016 में संदेश ने 15.5 किलो केसर का प्रोडक्शन किया. इस फसल के उन्हें 40 हजार रुपए किलो के हिसाब से कीमत मिली। इस तरह टोटल 6.20 लाख रुपए की पैदावार हुई.
पौधों, बुआई, जुताई और खाद पर कुल 1.60 लाख की लागत को घटाकर उन्होंने साढ़े पांच महीने में 5.40 लाख रुपए का नेट प्रॉफिट कमाया. मुश्किल हालात में भी संदेश ने इस नमुमकिन लगने वाले काम को अंजाम दिया. जिले के केन्हाला, रावेर, निभोंरा, अमलनेर, अंतुर्की, एमपी के पलासुर गांवों के 10 किसानों ने संदेश पाटिल के काम से मोटीवेट होकर केसर की खेती करने का फैसला किया है.

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