कभी थे “भगवान”…अब है “घर के बोझ”

भारत भूमि जहाँ माँ बाप की तुलना भगवान से की जाती है .. कई बार तो माँ बाप का दर्ज़ा तो भगवान से भी ऊपर दिया जाता रहा है. माँ बाप की आज्ञा का पालन करने के लिए भागवान श्री राम १४ साल के लिए वनवास तक चले गये थे. वही श्रवण कुमार जैसे लोग भी हुए जिन्होंने अपने माता पिता की इच्छा पूरी करने के लिए अपने प्राणों की बली तक दे दी. भारतीय समाज में इन कहानियों को बचपन से ही सभी बच्चों को सुनाया जाता है. या ये भी कह सकते है सुनाया जाता था.

 

जिस तरह का समाज हम पिछले कुछ सालों में देख रहे है…! सच में बेहद की दुःख दाई है …! आधुनिकता की दौड़ में आज कल बच्चों को उस ज़मीनी हकीकत से हम रूबरू नही कर पा रहे है. जिसकी जरूरत हमेशा ही रहती है. आधुनिकता के दौड़ में आज कल एक नया कल्चर सा निकला है. जिसको नुकिलीअर फैमिली के नाम से जाना जाता है.

शायद ही ऐसा कोई परिवार मिले जो की अपने बूढ़े माँ बाप को अपने साथ रखना चाहता हो. हैरानी की बात तो ये है. किस तरह से वो बच्चे , जो की पैसे और शहरी चकाचौंध में खो गये. उनके लिए उनके माँ बाप ने कितने कष्ट उठाये और खुद बच्चों की ख़ुशी के लिए गीले में सो कर बच्चों को सूखे में लिटाते थे. साथ ही न जाने कितनी बार अपने दिल पर पत्थर रख कर अपनी ख्वाइशों का गला घोट कर बच्चों की जरूरत को पूरा करते थे.

आज जब वो बच्चे बड़े हो गये है, उनको ही पहचानने से इंकार कर रहे है. वो भी सिर्फ झूठी शान के लिए.

बात जहाँ तक मज़बूरी की है न जाने कितनी बार माँ बाप के सामने मज़बूरी मुहँ फाड़ कर खड़ी हुई होगी लेकिन कभी भी उन्होंने हमको उनका अहसास तो दूर अंदाज़ा भी नही लगने दिया होगा…!

लेकिन आज यह समाज का कड़वा सच है. दिन पर दिन देश में वृद्धा आश्रम बढ़ते जा रहे है. कोई भी शहर हो आखिर में उसके किसी न किसी कोने में घर परिवार से दूर लाचार , बीमार और दुखी आँखों से दरवाजे की ओर निहारती बूढी आँखें मिल जायेंगी. जिन्होंने अपने बुढ़ापे को अच्छा गुजारने के लिए. बच्चों का सुनहरा भविष्य बनाने के लिये क्या क्या जतन किये और आज वहीँ बच्चे हर जतन निकल कर इनसे पीछा छुड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते है.

ऐसे ही एक वृधा आश्रम की बात करते है. जो की लगातार वृद्ध लोगों की मदद के लिए कई सालों से काम कर रहा है. लेकिन यह किसी संस्था के तरफ से खोला गया वृद्धा आश्रम नही है. बल्कि ओछिरा परब्रहमा मंदिर नामक मंदिर है जो की काफी प्राचीन है और कोल्लम डिस्ट्रिक्ट केरला में स्थित है.

यहाँ करीब ३७४ लोगों के रहने का इंतजाम किया गया है . जिनके परिवार ने हमेशा के लिए दरवाज़ों को बंद कर दिया है. यहाँ दूर-दूर से आये वृद्ध लोग अपनी ज़िन्दगी गुजर बसर कर रहे है. इन सभी बुजुर्गो का ख्याल मंदिर परिसर करता है. जो की सुबह के नाश्ते में चाय और चावल देता है और शाम के खाने का इंतजाम करता है. कई बार लंच का भी इंतजाम किया जाता है.

साथ ही इसी तरह से इनके लिए कपड़ों का भी इंतजाम किया जाता है. इन बुजुर्गो को रखने के लिए करीब ३० मकानों को बनाया गया है और साथ ही रात में सोने के लिए एक खुला बरामदा भी मौजूद है. जिसके नीचे किसी तरह से यह बुजुर्ग बसर करते है.

हैरानी तब होती है जब कई बार यह पता चलता है. कुछ बुजुर्गो को उनके परिवार ने जायदाद छीनने के बाद घर से निकाल दिया है..! कहाँ विश्व भर में संयुक्त परिवार और माँ बाप को भागवान का दर्ज़ा देने वाले देश में गिने जाने वाले देश की ऐसी दशा है. बदलाव तो कड़वा है लेकिन यही है वो, कडवा सच..! जहाँ आज बुजुर्गो को बोझ समझा जा रहा है. वही कभी बिना बुजुर्ग के घर को घर नही समझा जाता था.

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