आज पतंजलि का मतलब शुद्ध तेल, घी और आटा है, मगर असली पतंजलि तो कोई और ही था

दुनिया भर में पतंजलि के नाम पर भले ही ब्रांडेड प्रोडक्ट ने नाम कमा लिया हो. पतंजलि के नाम पर भले ही बाबा राम देव दुनिया को योग और आयुर्वेद का ज्ञान बांटकर वाहवाही लूट रहे हो. मगर जो असली पतंजलि था उससे लोग बहुत ही का परिचत है. तो चलिए आज हम आपको बताते है उस पतंजलि के बारे में जिसपर हिंदुस्तानियों का ही नहीं, पूरी दुनिया का कॉपीराइट है. इस पतंजलि का बाबा रामदेव से कोई संबंध नहीं. ये वही पतंजलि हैं, जिन्होंने दुनिया को ‘योगसूत्र’ दिया, जिन्होंने आयुर्वेद का ज्ञान फैलाया और हमें संस्कृत का व्याकरण समझाते हुए ‘महाभाष्य’ की रचना की…

महान चिकित्सक थे पतंजलि 

आजकल अगर  किसी से पूछा जाय कि पतंजलि के बारे में क्या जानते हैं, तो आपका जवाब होगा ; यह बाबा रामदेव की कंपनी, उनके ब्रैंड का नाम है, जो शरीर के लिए लाभदायक, स्वास्थ्यकारी आयुर्वेदिक उत्पाद बनाने का दावा करता है. बेहतर यही है कि पतंजलि नामक ब्रैंड से बचते हुए असली पतंजलि पर आऊं.

पतंजलि महान चिकित्सक थे और इन्हें ही ‘चरक संहिता’ का प्रणेता माना जाता है. ‘योगसूत्र’ पतंजलि का महान अवदान है. पतंजलि रसायन विद्या के विशिष्ट आचार्य थे. अभ्रक विंदास, अनेक धातुयोग और लौहशास्त्र इनकी देन है. पतंजलि संभवत: पुष्यमित्र शुंग (१९५-१४२ ई.पू.) के शासनकाल में थे. राजा भोज ने इन्हें तन के साथ मन का भी चिकित्सक कहा है.

पतंजलि काशी में ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में विद्यमान थे. इनका जन्म गोनार्ध (गोण्डा, उत्तर प्रदेश) में हुआ था पर ये काशी में नागकूप पर बस गये थे. ये व्याकरणाचार्य पाणिनी के शिष्य थे. काशीवासी आज भी नागपंचमी को छोटे गुरु का, बड़े गुरु का नाग लो भाई नाग लो कहकर नाग के चित्र बाँटते हैं क्योंकि पतंजलि को शेषनाग का अवतार माना जाता है.

आज का पतंजलि 

पतंजलि पर हिंदुस्तानियों का ही नहीं, पूरी दुनिया का कॉपीराइट है. आप अगर इन पतंजलि से परिचित नहीं हैं, तो इसमें आपका कसूर नहीं. क्योंकि आप अगर पतंजलि नाम को गूगल करेंगे, तो सबसे पहले आपको ‘पतंजलि आयुर्वेद’ नाम की एक एफएमसीजी यानी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनी का ब्योरा मिलता है.

जिसका हैडक्वॉर्टर हरिद्वार में है और दो लाख कर्मचारियों वाली इस कंपनी का कुल मूल्य तीस अरब रुपये आंका गया है. कंपनी ने 2015-16 वित्तीय वर्ष में 5000 करोड़ रुपये कमाए और इसका कुल टर्न ओवर 10,216 करोड़ रुपये है. पतंजलि के नाम पर गूगल में सबसे पहले खुलने वाली इस साइट को देखने के बाद हमें यह तथ्य स्वीकार कर ही लेना चाहिए कि वह पतंजलि, जिसके योग और आयुर्वेद के नाम पर हमने दुनिया भर में भारत का नाम चमकाया, उसे हम खुद ही दरकिनार कर चुके हैं.

बाबा रामदेव और पतंजलि का योगसूत्र 

बाबा रामदेव ने जब भारतीय मध्यवर्ग को कपालभाति की अफीम सुंघाना शुरू किया था, उनका योग तभी से दूषित होना शुरू हो गया था। पतंजलि ने अपने योगसूत्र में जिस योग को हम तक पहुंचाने की कोशिश की है और जिसकी व्याख्या बीकेएस आयंगर जैसे योगियों ने की है, वह बाबा रामदेव के योग से बहुत अलग है. योग के नाम पर सिर्फ ‘प्राणायाम’ यानी सांस लेने की विधियां और कुछ चमत्कृत करने वाले आसनों को बेचा जा रहा है. पर ये पतंजलि के योग के आठ में से सिर्फ दो ही हिस्से हैं.

पतंजलि ने अपने योगसूत्र में पहला ही सूत्र दिया है – योग: चित्त-वृत्ति निरोध: यानी योग मन को अपनी वृत्तियों से मुक्त करने का जरिया है. पतंजलि ने चित्त की क्षिप्त, मूढ़, विक्षिप्त, निरुद्ध और एकाग्र ये पांच तरह की वृत्तियां बताई हैं, जिनमें से पहली तीन के साथ योग संभव ही नहीं है. वह अंतिम दो वृत्तियों के साथ ही किया जा सकता है.

योग के आठ अंग इस प्रकार हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि. यम के तहत अहिंसा, सत्य, अस्तेय यानी चोर प्रवृत्ति का न होना, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह यानी जरूरत से ज्यादा संचित न करना आते हैं, जबकि नियम में शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्राणिधान को गिना जाता है. प्रत्याहार का अर्थ इंद्रियों को अंतर्मुखी करने से है, जबकि धारणा एकाग्रचित्त होना है. इसी तरह समाधि का अर्थ परम चैतन्य की अवस्था पाना है. जब योग की बात की जाती है, तो उसमें ये आठों भाग समाहित रहने चाहिए.

पतंजलि के योग के बूते विदेशों में न जाने कितने ही लोग चैतन्य को प्राप्त करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, लेकिन पतंजलि के अपने देश में उनके नाम पर या तो पतंजलि के फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स बेचे जा रहे हैं या आसन सिखाने के दुकानें खुली हुई हैं. दोनों ही ढंग से सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाना लक्ष्य बना हुआ है. इसमें कोई दो राय नहीं कि लगभग 200 ईसा पूर्व रहे पतंजलि हिंदुओं के सरताज हैं और योग तो बाकायदा हिंदू दर्शन का अभिन्न अंग है. लेकिन यह हैरान करने वाली बात है कि हमारे ही देश में पतंजलि को हमने एक उत्पाद में परिणित कर दिया है.

निश्चय ही ‘पतंजलि आयुर्वेद’ के जरिए अपनी तिजोरी में हजारों करोड़ रुपया भरकर बाबा रामदेव पतंजलि के ही अपरिग्रह के बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ जा रहे हैं और नियमानुसार तो ऐसा करने के बाद पतंजलि की शर्त के मुताबिक वह योग के हकदार भी नहीं रह जाते. मगर किसको पता कि पतंजलि असल में कौन थे और क्या थे उनके यम-नियम. अब तो पतंजलि तेल है, आटा है, गुड़, शक्कर, साबुन, शहद, क्रीम, तेल और जाने क्या-क्या है। बस, पतंजलि योग नहीं है.

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