सैंकडो दक्षिण कोरियाई प्रतिवर्ष अयोध्याकी यात्रा क्यूँ करते है ?

पुरे भारतवर्ष में अयोध्यानगरी को अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र स्थल माना जाता है. शरयू नदी के तट पर मनूजी ने स्थापित कि हुई इस अयोध्या नगरी में प्रभू श्रीराम का जन्म हुआ था इसलिये लाखो भारतवासी प्रतिवर्ष अयोध्यानगरी कि यात्रा करते है.

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इसही तरह सैंकडो दक्षिण कोरियाई नागरिक भी हर साल अयोध्या यात्रा करते है यह जानकर आप बिलकुल चौंक जाऐंगे.

दक्षिण कोरिया और अयोध्या के बीच में गहरे संबंध है. पुरानकालीन एक राजकन्या जो भविष्य में दक्षिण कोरिया कि रानी बनी थी, उनका समाधीस्थल अयोध्या नगरी है और उसी सम्राज्ञी Hur Hwang -ok के समाधिस्थल पर श्रद्धांजली अर्पित करने लोग अयोध्या आते है.

एक पौराणिक कथानुसार :

रानी Hur Hwang -ok अयोध्या में राजकन्या सुरीरत्ना के नाम से जानी जाती थी. वह अयोध्या की राजकन्या थी. उन्होने दक्षिण कोरिया की यात्रा की और कारक वंश के Kim Suro से इसवी सन ४८ में विवाह किया. कहते है कि, राजकन्या जहाज यात्रा कर दक्षिण कोरिया पहूँची थी और Geumgwan Gaya के राजा सुरो की पहली रानी बनी. विवाह के समय उनकी उम्र महज १६ साल थी.

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इन ऐतिहासिक सम्बधों के बीज इसवी सन के पहले शतक में पाए जाते है. कोरिया के प्राचीन दस्तावेज Sam Kuk Yusa में लिखा है,

Queen Huh का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था इसी कारण उनका स्मृति स्थल अयोध्या में है.

इस Karak वंश के तकरीबन ६० लाख लोग अयोध्या नगरी को अपना मानते है. २००१ साल में यह स्मारक लोगों के लिये खोला गया. उस वक्त सैंकडो इतिहासकार, सरकारी प्रतिनिधी और उत्तर कोरियाई प्रतिनिधी भी मौजूद थे. Kimhae Kim clan, Hur clan और Luncheon Yi Clan इन वंशों के लगभग 70 लाख लोग एक दुसरे से जुडे हुए है.

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दक्षिण कोरियाई रानी का अयोध्या से नाता २००० साल तक इतिहास के पन्नो में छिपा रहा परंतु इसवी सन २००० में यह सम्बध अयोध्या के महापौर और Kim- Hae शहर के महापौर द्वारा Sister city bond पर २००१ साल में मुहर लगाकर फिर से जोडा गया. दक्षिण कोरिया में रानी की समाधि Kimhae में बनाई गयी है और समाधि के ठीक सामने भव्य पत्थर का मंदिर बनाया गया है. यह पत्थर अयोध्या नगरी से मंगवाये गये है, ऐसा माना जाता है.

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इस विवाह की कथा अत्यंत प्राचीन है, रानी दक्षिण कोरिया की यात्रा पर क्यों और कैसे गई और उनकी वहां के राजा से मुलाकात कैसे हुयी और उनके विवाह की कहानी है. ऐसा माना जाता है कि,

राजकन्या सुरीरत्ना के पिताको सपने में स्वर्गके देवता Sange je दिखे और उन्होने आदेश दिया कि राजकन्या को दक्षिण कोरिया भेजा जाये, क्योंकि वहां के राजा ने अपनी पत्नी और सम्राज्ञी का चुनाव अब तक नही किया है. फिर राजा ने राजकन्या को दक्षिण कोरिया भेज दिया. राजकन्या ने राजा से विवाह कर लिया और राजा ने उन्हें Hur Hwang – ok यह नया नाम दिया और रानीने प्रजा का पुत्रवत पालन किया और १५७ साल की उम्र में उनका देहान्त हुआ.

अयोध्या में Hur Hwang – ok रानी का स्मारक दक्षिण कोरियाई शैली से बना हुआ है. इस स्मारक में तीन मीटर चौडा, लगभग ७.५ क्विंटल वजनी पत्थर का इस्तेमाल हुआ है जिसे दक्षिण कोरिया से मंगवाया गया था. यह स्मारक Kim-Hae-Kim के वंशजो के लिये तीर्थस्थल है, इसलिये सैंकडो लोग अयोध्या में बसे हुए इस स्मारक स्थल की यात्रा करते है.

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पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्मारक स्थल का दौरा किया, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की थी कि अयोध्या में दक्षिण कोरियाई रानी का भव्य स्मारक दक्षिण कोरियाई परंपरानुसार बनाया जायेगा.

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इस बात पर दोनो देशों ने सहमति दर्शायी है और आशा है कि दोनो देशों के आपसी सम्बध और गहरे होंगे.

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