एक दशक से ‘मृत’ पड़े हुए नदी को  ७०० लोगों ने ७० दिनों में पुनर्जीवित किया !

भारतीय संस्कृति में नदी को पवित्र माना जाता हैं परन्तु हम उसे प्रदूषित करते हैं, कई सालो बाद पानी की किल्लत महसूस करते है और अंतत: मृत नदी के तट पर बीते दिनों को  याद करते हैं.

क्या आपको लगता है कि लगभग दस वर्षों से ‘मृत’ घोषित की नदी को पुनर्जीवित कर पाना संभव है? आप सोच में पड गये होंगे लेकिन यह बिलकुल संभव हैं.  नदी के पुनरुत्थान का करिश्मा केरल के एक ग्राम पंचायत ने  कर दिखाया हैं.

kuttumperoor-marathipizza01
indianexpress.com

कुट्टमपेरूर नदी  कई सालों से गंभीर प्रदूषण और अवैध रेत खनन के कारण, लगभग पिछले वर्ष तक नदी का प्रवाह अस्पष्ट हो गया था, किन्तु अलापुझा जिले के बुधानूर ग्राम पंचायत की अगुआई वाली पहल ने अकल्पनीय काम किया.

  • यह नदी पंबा और अचंकोविल दोनों नदियों की एक सहायक नदी है.
  •  १२ किमी की लंबाई और लगभग १०० मीटर की चौड़ाई के लिए जानी जाती हैं .
  • बुधानूर के निवासियों के लिए पेयजल का स्रोत था. चावल के खेतों की जमीन के लिए सिंचाई प्रदान करने के अलावा, नदी एक ऐसा मार्ग भी था, स्थानीय व्यापारियों द्वारा जिसका इस्तेमाल अपने माल के परिवहन के लिए किया जाता था.

दिलचस्प बात यह है कि, मानसून के दौरान नदी ने कई बार मदतगार भूमिका निभाई है, जब पंबा और अचंकोविल नदियों में पानी का स्तर बढ़ जाता था तो अधिक पानी विभिन्न स्थानों पर बहाकर बाढ़ को विफल कर दिया था.

“नदी की पुनर्जीवन योजना का विचार कई सालों से चल रहा था किन्तु कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही थी.  नदी सफाई अभियान पिछले साल नवंबर में वास्तविकता में आया, यह बुधानूर पंचायत कार्यालय में प्रमुख क्लर्क पद पर कार्यरत रेशमी प्रिया ने हमें बताया.

पंचायत अध्यक्ष, विश्वम्भरा पनिकर इस पहल के पीछे की प्रेरणा शक्ति हैं. नदी की स्थिति अत्यंत दयनीय थी.  नौकांए कई बार प्रदुषण से फैले हुए जंगली घास में फंस जाती. यह कथित रूप से इतनी खराब हो गई थी कि एक बार, यात्रियों को नदी से बाहर निकालने के लिए अग्निशामकों को बुलाया जाता था.

इस अभियान में बुधानूर पंचायत के तहत सभी १४  वार्डों के पुरुषों और महिलाओं सहित ७०० श्रमिक शामिल थे, जो मनरेगा योजना के तहत कार्य के लिए कार्यरत थे और ७०  दिनों की अवधि में, इन श्रमिकों ने नदी को बचाने के लिए अपनी पूरी जान लगा दी.

नदी और नदी को सीमित करने वाले जंगली घास को बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू हुई. यह करने के बाद, श्रमिकों ने प्लास्टिक कचरे को हटाने शुरू कर दिया. अंत में, वे नदी के नीचे पहुंचे, जहां घना कचरा कई वर्षों से जमा हुआ था.

kuttemperoor river-kuchnaya.com
indiahub.com

“यह आसान काम नहीं था और कभी-कभी खतरनाक भी साबित होता था. वास्तव में कई वर्षों से जमे हुए कचरे को साफ करना एक विशाल कार्य था, जिसमें सीवेज, प्लास्टिक और मिट्टी के तलछट शामिल थे, “

उस इलाके में एक बार कुट्टमपेरूर नदी ने पानी के स्थिर पूल के लिए रास्ता बना लिया था, धीरे-धीरे ताजा पानी लेना शुरू कर दिया और इस प्रक्रिया में एक महीने के भीतर और आगे बढ़ने शुरू कर दिया.

“नदी के पुनरुत्थान के बाद जब हम लोगों को वहां ले गए तो सब के  ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. एक नदी जिसे नदी कहलाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं था, एक असंभव सपना था जो वास्तविकता में बदल गया.” इस साल २०  मार्च को अतिसूक्ष्म कार्य समाप्त हो गया, अंततः कारवाई में पानी उचित प्रवाह के साथ स्पष्ट हो गया था. “हैरानी की बात है कि परियोजना के पूरा होने के बाद भी क्षेत्र में जल स्तर बढ़ना शुरू हो गया है. कुओं में पहले से अधिक मात्रा की में पानी है.”

यद्यपि पुराने दिनों में नदी का पानी पीने के पानी का स्रोत रहा था, फिर भी बुधानूर के लोग अभी भी इसका उपयोग करने के बारे में सावधान हैं, कई वर्षों के प्रदुषण को भूल नहीं भूल सकते. हालांकि, नदी के सफल पुनरुत्थान के साथ, वे निश्चित समय बीतने के बाद भी ऐसा होगा.

kuttumperoor-marathipizza02
scoopwhoop.com

लोगों ने स्नान और धोने के प्रयोजनों के लिए नदी के पानी का उपयोग करना शुरू कर दिया है. हमें उम्मीद है कि नदी का पानी बहुत जल्द पीने के लिए भी फिट हो जाएगा.

नदी के पुनरुत्थान का यह प्रयास वाकई प्रशंसनीय हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *