लोग भारत जैसे “गंदे” देश में क्यूँ रहते हैं? इस बेहूदा सवाल पर विदेशी व्यक्ति का बेहतरीन जवाब!

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आज का युग इंटरनेट का युग है. सोशल मीडिया के जरिये लोगों को एक दूसरे से जुड़ने का मौका मिल रहा है. पुराने दोस्त करीब आ रहे हैं. सोशल मीडिया से कई तरह की जानकारियां भी उपलब्ध हो रही हैं.

कभी कभी कुछ ऐसे सवाल भी होते हैं जिनके जवाब ढूँढ़ने में हम असमर्थ होते हैं ,वह सवाल अगर सोशल मीडिया पर अपलोड किया तो लोगों से अलग अलग तरह के जवाब मिल जाते हैं. या एक विषय पर हम कई लोगों के विचार जान सकते हैं.

अनेक लोग विज्ञान, इतिहास तो राजनीति पर भी प्रश्न पूछते हैं. कुछ दिन पहले एक व्यक्ति ने बड़ा ही अजीब सा और भद्दा सवाल किया कि,

लोग भारत जैसे गंदे देश में कैसे रहते हैं? उस व्यक्ति ने पूछा की भारत में इतनी गंदगी होते हुए भी लोग कैसे रह पाते हैं?

ये प्रश्न पढ़ते ही लोगों में देश भक्ति जाग गई. सबका खून खौलने लगा और लोगों ने उसे बहुत खरी खोटी सुनाई. आखिर हमारे देश की इज्जत का सवाल है.

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पर एक व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने कई देश घूमे हैं. इन्होंने इस व्यक्ति को सटीक जवाब देकर चुप करा दिया.

ये व्यक्ति Harun Resit Aydin हैं. Aydin ये Nesta Creative के फॉरेन मार्केट्स के डायरेक्टर हैं.

इन्होंने अपने काम के सिलसिले में कई देशों की यात्राएं की हैं. ये मूलतः तुर्किश हैं पर फिर भी इन्होंने भारत को गंदा देश कहने वाले व्यक्ति को बहुत ही उम्दा जवाब दिया.

Aydin इन्होंने लिखा कि…

सिर्फ भारतीय ही क्यूँ, मुझे भी भविष्य में भारत मे स्थाई होना अच्छा लगेगा.

इसके बाद इन्होंने दो फोटो अपलोड किये जिसमें एक न्यूयार्क की एक जगह का तो दूसरा पेरिस का है जिसमें रास्ते पर गंदगी पड़ी हुई दिखाई दे रही है.

और एक नीचे तीसरा फोटो जिसमें मैसूर शहर के साफ रस्ते दिखाये गये हैं.

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इस फोटो को अपलोड कर इन्होंने कहा..

पश्चिमी विकासित देश साफ़ हैं और भारत गंदा, ऐसा समझना गलत है, विश्व का कोई भी देश पूरी तरह अच्छा या खराब नहीं. पर इतना जरूर है कि इस विश्व में रहने वाले लोग दिल से जरूर अच्छे हैं.

उनका कहना है कि लोगों के दिल में दूसरों के प्रति इतना गुस्सा या ईर्ष्या क्यूँ है?इतनी नफ़रत कहाँ से आती है? किसी भी व्यक्ति, धर्म, वंश, देश, रंग और किसी के मत के विषय में इतने क्रोध का कारण क्या हो सकता है?

आपके व्यक्तिगत जीवन में अगर किसी व्यक्ति या किसी देश से आपको कड़वे अनुभव मिले हो तो जरूरी नहीं की सभी ऐसे ही हैं.

“People are the enemy of the unknown.”

इस वाक्य के अनुसार जिसको हमने देखा नहीं या जिसके बारे में हम कुछ जानते नहीं उसके बारे में क्यूँ गलत धारणा बना लेते हैं?

इस तरह का द्वेष ज्यू लोगों के बारे में द्वितीय महायुद्घ के समय देखा गया. उसके बाद युरोप में इस्लाम के विरुद्ध कड़वाहट नजर आई. वैसे ही मुस्लिम लोग इसराईल से नफ़रत करते हैं.

ऐसी ही घृणा को टर्की ने, भारत ने, पाकिस्तान ने, नास्तिकों ने, कैथलिक लोगों ने, भगवान को मानने वाले और अन्य कई लोगों ने सहन किया है और अभी भी कर रहे हैं, ये घृणा बहुत बुरी और मन को आहत करने वाली है.

ये घृणा और द्वेष आता कहाँ से है?

अख़बार में प्रकाशित हुई खबरों, लेख पढ़कर, या किसी विचारधारा पर आधारित किताबे पढ़कर, टेलीविजन पर प्रसारित हो रही चर्चा देखकर हम कभी भी ना देखी हुई जगह, ना मिले हुए किसी व्यक्ति के संबंध में गलत धारणा बनाकर उस से नफ़रत करने लगते हैं.

वो कहते हैं कि उन्होने कई देश घूमे हैं. उन देशों के अनेक लोगों से दोस्ती की पर कभी उस देश और उस व्यक्ति के बारे में गलत धारणा नहीं बनाई जहां पर वो अभी तक गये ही नहीं.

उन्हें हमेशा उनके जैसे ही निर्मल मन के, कुछ दुखी, कुछ डरपोक लोग ही ज्यादा मिले.

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भारत के बारे में उनका कहना है कि, उनको भारत बहुत पसंद है और वह यहाँ रह भी सकते हैं क्यूँकि उन्हें यहाँ के बच्चों के चेहरे पर एक मासूमियत दिखती है. एक आशा नजर आती है, उनकी आंखों में एक अलग खुशी नजर आती है जो बाकी प्रगत देश के बच्चों में नहीं नजर आता.

क्यूँकि उन लोगों के पास विकसित तकनीकी है, सभी सुख सुविधायें हैं फिर भी उनके पास कमी है वो है प्रेम और शांति.

जब हम पैसों के पीछे भाग ने लगते हैं तो छोटी छोटी खुशियों से मिलने वाले सुख को गंवा देते हैं.

एक मशीन की तरह हमारा जीवन हो जाता है जिसमें भावनाएँ मर जाती हैं. पर इस देश के बच्चों को देखने पर अहसास होता है कि, इनके जैसा जीवन अच्छा है जो हर छोटी बात में अपनी खुशी ढूँढ़ लेते हैं.

मुझे भारत पसंद है इसका एक और कारण कि यहाँ पर कुतुबमीनार जैसी ऐतिहासिक धरोहर है. मानव की प्रगति को साबित करने वाली हडप्पा संस्कृती, यहाँ की भाषा, यहाँ की मिट्टी का एक एक कण गौरव शाली इतिहास की गाथा सुनाते हैं.

इस देश की विविधता में एकता विश्व प्रसिद्ध है.

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उसके पहले इस तरह की संस्कृति सिर्फ ओटोमन साम्राज्य में थी. युरोप में जैसे ही दूसरे स्थान से लोग आने लगे तो शांति भंग होने लगी, पर भारत में तो अनेक धर्म के लोग एक साथ खुशी खुशी रहते हैं, और यहाँ दूसरे देश के लोगों को भी आश्रय में लेते हैं.

जब भारत के लोगों से मिलना होगा तब समझ आएगा कि यहाँ के लोग कितने भावुक हैं. बड़े मन के हैं, पर ये सब होने पर भी भारत को परफेक्ट देश का दर्जा नहीं दिया जा सकता.

कोई देश या कोई व्यक्ति कभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता हर एक में कुछ ना कुछ कमी होती है.
कोई भी देश गंदा नहीं नहीं कहा जा सकता बस लोगों के दिलों में मैल है.भारत मे गरीबी, गंदगी, भ्रष्टाचार, सुविधाओं की कमी है पर फिर भी ये देश रहने के लिये योग्य नहीं ऐसा नहीं है.

जो लोग इस देश में जन्में, यही पर बड़े हुए, शिक्षा भी यहाँ से ली उनको यह समझना चाहिये कि ऐसे देश के लिये आपके मन में अगर नकारात्मक विचार हैं तो शत्रुओं की क्या जरूरत?

वो लोग कभी अपने देश वापस नहीं आएंगे क्यूँकि बाहर के देश उन्हें अच्छा पैसा और सुविधायें दे रहे हैं.

अगर सक्षम और बुद्धिमान लोग अपना देश छोड़ कर दूसरे देशों के विकास में योगदान देंगे तो अपने खुद के देश की तरक्की के बारे में कौन सोचेगा? आपको क्या लगता है कि, युरोप और अमेरिका जैसे पहले से मजबूत देशों को आपकी सच में जरूरत है?

आज आपके भारत देश को आपकी बहुत जरूरत है.

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इस देश में आकर बहुत कुछ अच्छा करने की इच्छा है मेरी, मैं अकेला तो बहुत कुछ नहीं कर सकता ये भी मुझे पता है पर कुछ हिस्सा तो दे सकता हूँ.

कई वर्ष पूर्व Aydin जैसे तुर्की लोग अपने देश वापस आये क्यूँकि उन्हें अपने देश का विकास करना था.देश को समृद्ध बनाना था.उस समय तुर्की युरोप से ३० वर्ष पीछे था जब वो जर्मनी में दस गुना ज्यादा कमा रहे थे.

जब मैं इसकी तरफ पीछे मुड़कर देखता हूँ तो तब से अब तक हुई प्रगति को देखकर मुझे मेरी मेहनत सफल होती हुई दिखाई देती है. मुझे कभी भी मेरे देश में वापस जाने का अफ़सोस नहीं हुआ. पर मेरी यही इच्छा है कि भारत देश मेरा सेकंड होम बने.

अगर किसी दूसरे देश का अनुभवी व्यक्ति अपने देश के बारे में अपनापन और प्यार जाहीर करता है और देश की प्रगति के लिये सोचता है. तो हम क्यूँ नहीं अपने ही देश के बारे में सकारात्मक सोच रख सकते.

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