जम्मू कश्मीर के बाद अब कर्नाटक राज्य का होगा राजकीय ध्वज

पूरी दुनिया में हर देश का एक अपना राष्ट्रीय ध्वज होता है. जैसे हमारे देश का तिरंगा है. मगर अब धीरे-धीरे ये अब राज्यों पर भी लागू होता नजर आ रहा है. भारत के जम्मू कश्मीर राज्य के बाद अब एक और राज्य कर्नाटक ने भी अपने राज्य के राजकीय ध्वज की घोषणा की है. फिलहाल अभी इसे केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिली है. तो आईये आपको बताते है उन राज्यों के बारे में जहाँ राष्ट्रीय ध्वज के तिरंगे के साथ राजकीय ध्वज भी फहराया जाता है.

कर्नाटक राज्य में सालों से की जा रही है अलग ध्वज की मांग

हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य के लिए प्रस्तावित आधिकारिक झंडा पेश किया. दरअसल राज्य सरकार द्वारा गठित एक समिति ने पिछले साल कर्नाटक के लिए पृथक झंडे की सिफारिश की थी. फिलहाल अभी इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाना है. आपको बता दें कि कर्नाटक राज्य में अलग झंडे के लिए वर्ष 2012 से की जा रही है मांग.

यदि कर्नाटक को राज्य के झंडे की मंजूरी मिल जाती है तो यह अकेला ऐसा प्रदेश नहीं होगा जिसका अपना अलग झंडा होगा. भारत में पहले से एक राज्य है, जिसके पास खुद का अलग झंडा है.

जम्मू-कश्मीर भी है राजकीय झंडा 

जम्मू और कश्मीर भारत का एकमात्र राज्य है, जिसे अपने राज्य का अलग झंडा फहराने का अधिकार प्राप्त है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस राज्य को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 अंतर्गत विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है. हालांकि, जम्मू और कश्मीर का अलग झंडा होना कई बार विवादों में आ चुका है. कई बार राज्य के अलग झंडे का विरोध करते हुए ये तर्क दिया गया कि एक ही देश का हिस्सा होते हुए भी जम्मू-कश्मीर को अलग झंडा फहराने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. ये मामला कई बार कोर्ट में भी उठाया जा चुका है.

जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के साथ ही राज्य का झंडा भी फहराया जाता है. जम्मू-कश्मीर के झंडे की गहरी लाल पृष्ठभूमि श्रम की परिचायक है. इसके ऊपर बना हल कृषि को दर्शाता है. झंडे पर सफेद रंग की तीन सीधी धारियां बनी हुई हैं. ये धारियां राज्य के तीन भूभागों, जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख का प्रतिनिधित्व करती हैं.

कर्नाटक के पास पहले से था अलग झंडा

अलग झंडे की मांग कर रहे कर्नाटक के पास 1960 से ही एक अलग झंडा था. वर्ष 2012 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस झंडे को कानूनी मान्यता दे दी थी. लेकिन एक कानूनी लड़ाई के बाद सरकार को अपने कदम वापस खींचने पड़े थे. उस वक्त सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा था कि वह कर्नाटक के लिए लाल और पीले रंग के झंडे को नहीं अपना सकती है क्योंकि एक अलग झंडा देश की एकता और अखंडता के खिलाप होगा.

ये तो आधुनिक युग की बात है. यदि प्राचीन इतिहास के पन्नों को पलटा जाय तो मालूम होता है कि राजशाही शासन और मुग़ल शासन के वक्त में भी राजा महाराजा और मुगलों के खुद का अपना गढ़ और सल्तनत हुआ करती थी. जिनका अपना अलग ही ध्वज हुआ करता था.

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