एक मंदिर जहां राहुल और प्रियंका के प्रवेश पर है रोक, इंदिरा गांधी को भी नहीं मिली थी इंट्री

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अक्सर हम देखते है की, कैसे चुनाव नजदीक आने के बाद सभी पार्टी के उम्मीदवार अपनी जीत की कामना के लिए देशभर के जाने-माने दार्शनिक स्थलों पर जाकर मत्था टेककर अपनी-अपनी विजय की कामना करते है.

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मगर चार धामों में से एक मंदिर ऐसा भी है, जहां गांधी परिवार को प्रवेश नहीं मिल सकता.
इसके पीछे की वजह तो पूरा लेख पढ़ने के बाद ही जान पाएंगे…!

भारत के चार धामों में से एक ओडिशा के पुरी का जगन्नाथ मंदिर दुनियाभर में अपने कई चमत्कारी वजहों से प्रसिद्ध है. हर हिंदू जीवन में कम से कम एक बार ही सही पर जगन्नाथ मंदिर के दर्शन ज़रूर करना चाहता है.

भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए लोग पूरी दुनिया से आते हैं. समुद्र के तट पर मौजूद इस मंदिर में प्रवेश करते ही समुद्र की लहरों की आवाज़ें शांत हो जाती हैं. यही नहीं बल्कि इसके अलावा इस मंदिर से जुड़े ऐसे कई चमत्कारी पहलू है, जिसका अनुभव तो यहां जाने पर ही मिल सकता है.

इंदिरा गांधी को नहीं मिला था प्रवेश-:

यह मंदिर भारत की धरोहर है. लेकिन इस मंदिर में प्रवेश के लिए किसी व्यक्ति का हिंदू होना अनिवार्य माना जाता है.

सन 1984 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इस मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सका था. दरअसल इंदिरा गांधी ने फ़िरोज़ जहांगीर गांधी से शादी की थी, जो कि एक पारसी थे.

अमूमन ऐसा माना जाता शादी के बाद लड़की का गोत्र पति के गोत्र में बदल जाता है। पारसी लोगों का कोई गोत्र नहीं होता है। इसलिए इंदिरा गांधी हिंदू नहीं रहीं थी।

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इसी कारणवश राहुल और प्रियंका गांधी को भी इस मंदिर में प्रवेश नहीं है. कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी नरम हिंदुत्व की राजनीति के लिए जाने जाते है.

इसलिए उन्होंने कुछ साल पहले केदारनाथ के दर्शन कर कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी की थी.

हर चुनाव में राहुल मंदिरों के दौरे करते हैं. लेकिन उन्होंने कभी जगन्नाथ मंदिर में दर्शन की योजना नहीं बनाई.

जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुताबिक इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की तरह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी पारसी ही हैं.

इसलिए उनको मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता. जगन्नाथ मंदिर के सेवायतों के मुताबिक राहुल गांधी का गोत्र फ़िरोज़ गांधी से माना जाएगा ना कि नेहरू से.

राहुल गांधी भले अपने आप को जनेऊधारी दत्तात्रेय गोत्र का कौल ब्राह्मण बताएं. लेकिन सच्चाई ये है कि, वो फ़िरोज़ जहांगीर गांधी के पौत्र हैं और फ़िरोज़ जहांगीर गांधी हिंदू नहीं थे.

लुटेरों और आक्रमणकारियों की वजह से सालों दूर रहे भगवान-:

दरअसल सिर्फ राहुल गांधी या फिर इंदिरा के ही प्रवेश पर रोक नहीं. बल्कि उन सभी गैर हिन्दुओं को प्रतिबंध जिनका नाता कही न कही उनसे है, जिन्होंने मंदिर को लूटा या अपवित्र किया था.

इतिहास गवाह है की, जगन्नाथ मंदिर को लूटने और मूर्तियों को अपवित्र करने के लिए हुए हमलों की वजह गैर-हिन्दू ही रहे है.

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भक्तों का मानना है की, इन हमलों की वजह से 144 वर्षों तक भगवान जगन्नाथ को मंदिर से दूर रहना पड़ा. यही कारण है की, मंदिर में गैर हिंदुओं को प्रवेश दिए जाने की इजाजत नहीं है. जगन्नाथ मंदिर पर आक्रमणकारीयों द्वारा कई बार हमला कर 17 से ज्यादा बार उसे नष्ट करने की कोशिश की गई. हमलावरों की वजह से भगवान को अपना मंदिर कई बार छोड़ना पड़ा. 

पिछले एक हजार वर्षों में मुस्लिम बादशाहों और सुल्तानों के राज में हिंदुओं के हजारों मंदिरों को तोड़ा गया. अयोध्या में राम जन्म भूमि, काशी में विश्वनाथ और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि का विवाद भी इसी इतिहास से जुड़ा है.

इन हमलावरों में से एक मुहम्मद गझनी ने भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर मौजूद सोमनाथ के मंदिर को 17 बार नष्ट कर लुटा था.

ओडिशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर मंदिर पर हुए हमलों और मूर्तियों को नष्ट कराने की कोशिशों का पूरा इतिहास दिया गया है. वेबसाइट में मौजूद एक लेख में बताया गया है कि, मंदिर और मूर्तियों को नष्ट करने के लिए कितनी बार हमला किया गया.

जगन्नाथ मंदिर के गेट पर ही एक शिलापट्ट में 5 भाषाओं में लिखा हुआ है कि, यहां सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश की इजाज़त है. जगन्नाथ मंदिर को 20 बार विदेशी हमलावरों के द्वारा लूटा गया.

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खासतौर पर मुस्लिम सुल्तानों और बादशाहों ने जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों को नष्ट करने के लिए ओडिशा पर बार-बार हमले किए. इसके बावजूद ये हमलावर जगन्नाथ मंदिर की तीन प्रमुख मूर्तियां जैसे की भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियों को नष्ट नहीं कर सके.

बताया जाता है की, मंदिर के पुजारियों ने बार-बार मूर्तियों को छुपा दिया. एक बार तो मूर्तियों को गुप्त रूप से ओडिशा राज्य के बाहर हैदराबाद में भी छुपाया गया था.

दिल्ली में मुगल सल्तनत के कमजोर होने और मराठों की ताकत बढ़ने के बाद जगन्नाथ मंदिर पर आया संकट टला और धीरे धीरे जगन्नाथ मंदिर का वैभव वापस लौटा.

जगन्नाथ मंदिर के मूर्तियों के बार बार बच जाने की वजह से हमलावर कभी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए.

पुरी के स्थानीय लोग लगातार इस मंदिर को बचाने के लिए संघर्ष करते रहे. ओडिशा के लोग मंदिर के सुरक्षित रहने को भगवान जगन्नाथ का एक चमत्कार मानते हैं.

नोट-ये लेख किसी भी राजनीतिक पार्टी का पक्षधर या विरोध अथवा किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं है, बल्कि आज भी जातिवाद और भेदभाव जैसी परमपारों का एक उदाहरण है.
स्रोत-Zee News

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