“ताजमहल बनाने वाले कारीगरों के हाथ तोड़े गये थे”:सच या अफवाह?

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ताज महल के बारे में कौन नहीं जानता? हमारे भारत देश की शान है ताज, या ये भी कह सकते है कि देश का ताज है ताजमहल. दुनिया के सात आशचर्यों में एक तथा सभी के लिये प्यार की एक अनोखी मिसाल है.

मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज की याद में प्यार का एक प्रतीक ये स्मारक बनवाया था.इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इसे दूध से नहलाया हो.

ताज महल सफ़ेद संगमरमर से बना हुआ है. यह उत्तर प्रदेश के आगरा में है. एक संकरी सी गली के अंदर जाकर इतना खूबसूरत स्मारक हो सकता है, यकीन नहीं आता.

ताजमहल का निर्माण ईसा सन् १६५३ में हुआ, उस्ताद अहमद लाहौरी के मार्ग दर्शन में २०,००० मजदूरों ने मिलकर इस स्मारक को पूरा किया.

ताज महल मुगल स्थापत्य शैली का उत्तम उदाहरण है. युनेस्को ने ताज महल को १९८३ में विश्व की धरोहर घोषित किया है.

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हजारों पर्यटक देश विदेशों से यहाँ घूमने आते हैं. ताज महल बहुत ही सुंदर है और वहाँ की कारीगरी बहुत ही बेमिसाल है.

ताजमहल का निर्माण वाकयी एक आश्चर्य है.

ताजमहल के बारे में एक अनोखी बात हमेशा चर्चा में रहती है. वो ये की ये स्मारक के निर्माण के बाद शाहजहाँ ने कारीगरों के हाथ काट दिये थे.

पर सचमुच ही यह बहुत दिल दहला देने वाली बात है कि, जिन लोगों ने शाहजहाँ के सपने को एक रूप दिया, अपना सारा कौशल्य इस स्मारक को बनाने में लगा दिया, उन्हीं के हाथ काट देना क्या ये बेइन्साफी नहीं है?

अगर उनको पता होता की, उनकी मेहनत का ये फल मिलेगा तो शायद वो इतनी मेहनत नहीं करते. आईये जानते है कि इस बात में कितनी सच्चाई है…

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ताजमहल की निर्मिती उसकी वास्तु ये सब अद्वितीय तो हैं ही पर इसके पीछे जो कहानी है वह भी विचित्र है.

इसके बारे में एक बात ये भी कही जाती है कि, जब ताजमहल बनकर तैयार हुआ तब कारीगर अपने हाथों से बनायी गई इस ख़ूबसूरत स्मारक को देख कर बहुत खुश हुए. पर जैसे ही उन्हें ये खबर मिली कि उनके हाथों को काट दिया जाएगा तो यह बात सुनकर सबके होश ही उड़ गये.

पर इस बात में कितनी सच्चाई है इसके कोई पुख्ता सुबूत नहीं है. पर फिर भी पर्यटकों को ये कहानी सुनाई जाती है.

पर इस कहानी के कारण ही लोगों में इस स्मारक को करीब से देखने की उत्सुकता बनी रहती है.

एक कथा के अनुसार जब ताजमहल बनकर तैयार हुआ तो शाहजहाँ ने इस अद्भुत स्मारक को बनाने वाले कारीगरों के हाथ काटने का आदेश दिया. जिसका कारण था की वह दोबारा ऐसा कुछ ना बना सके.

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कितने निर्दयी और क्रूर विचार थे शाहजहाँ के. इतना ही नहीं ये बात भी प्रचलित है कि, उनकी आंखें भी निकाल दी गई थीं, कि वह इससे खूबसूरत कुछ और ना देख सकें.

जैसे कारीगरों ने ये स्मारक बनाकर गुनाह किया.

जिस प्यार की निशानी ताजमहल को देख लोग खुश हो जाते हैं. अगर उसे बनाने वालों को अपने हाथ और आंखें खोनी पड़ी तो उन लोगों के जीवन का क्या मतलब रहा होगा फिर? ऐसे विचार ही मन को निराश कर देते हैं.

बहुत से इतिहासकारों का कहना है कि, ये सभी बातें निराधार हैं. इसके कोई सबूत नहीं हैं केवल कहानी ही है.

पर उस समय ऐसी घटनाएं घटित होती थीं इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता. पर अगर ये सच है तो सचमुच ही भयानक है.

मगर कुछ लोगों का कहना है की, ये सही नहीं ही.

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उनके अनुसार शाहजहाँ ने कारीगरों के हाथ काटे थे यानी, उन्हें इतने पैसे दिये की फिर उन्हें कमाने की जरूरत नहीं पड़ती.

कुछ लोगों का मानना है की ताजमहल और शाहजहाँ के अपनी पत्नी के प्रति प्यार को प्रसिद्धि देने के लिये ये कहानियाँ गड़ी गयी.

क्योंकि ताजमहल क्या केवल कारीगरों ने बनाया? उसका डिजाइन, कॉन्ट्रैक्ट किसी दूसरी संस्था ने तो लिया होगा फिर उनके साथ ऐसा कैसे किया जा सकता है?

१७ वी सदी में शाहजहाँ विश्व का सबसे अमीर व्यक्ति था, मुग़ल साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली बादशाह भी था.

अगर हम उसके आर्थिक दृष्टि से सोचें तो लगता है की, इतना पराक्रमी राजा इतनी मूर्खता का काम नहीं करेगा. शाहजहाँ ने ऐसा क्रूर काम नहीं किया होगा क्यूँकि वह जनता के प्रति इतना संवेदनहीन नहीं था.

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शाहजहाँ को निर्माण कार्य बहुत पसंद थे और ताजमहल उनकी आखिरी निर्मिती है ऐसा ख्याल भी उनके दिमाग में नहीं आया होगा.

उन्होंने मकबरे, लाल किला, जामा मस्जिद का निर्माण करवाया. अगर वो हमेशा ऐसे हाथ कटवाने का काम करते तो कोई भी कारीगर उनका काम करने को तैयार नहीं होता.

ऐसा भी कहा जाता है कि, शाहजहाँ को स्वयं के लिये ताजमहल बनवाना था पर वो काले रंग में, यमुना नदी पर ,वो भी सफ़ेद ताजमहल के सामने.

इस बात के कई सबूत भी मिले हैं. अगर शाहजहाँ को ऐसा काम करवाने की इच्छा थी तो हाथ कटवाने का काम नहीं करवाते, सच झूठ क्या है ये इतिहासकार ही जानते होंगें.

ये सब जानने के बाद लगता है कि, ये एक काल्पनिक कहानी ही होगी. क्यूँकि जो व्यक्ति अपनी मृत पत्नी की याद में मुमताज महल बना सकता है. वह व्यक्ति कितना ही बहादुर शूरवीर क्यूँ ना हो पर वो बहुत संवेदनशील होगा.

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ऐसा सम्राट इस प्रकार का विचार कभी कोई करेगा नहीं. पर उस समय नियम कानून इतने सख्त होते थे कि कुछ नहीं कहा जा सकता.

या तो ताज महल की प्रसिद्धि बढाने के लिये ये कहानी बनाई गई होगी और कई वर्षों तक यही सुनने के कारण हम उसे सच मानने लगे.

कुछ भी हो ताजमहल जैसी कोई खूबसूरत रचना फिर नहीं हुई और ना कभी होगी. ताजमहल की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है. और लोग ताजमहल को देखकर जरूर कहते हैं.. भाई वाह.

इस तरह अपनी कल्पना और सपने को पूरा करने वाले बादशाह और उनके सपने को आकार देकर दुनिया को एक मिसाल देने वाले कारीगरों को सलाम.

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