सीरिया के राहत कैंपों में सेक्स के बदले मिलता है भोजन

अरबी देश सीरिया में पिछले कई दिनों से हवाई हमले से प्रभावित सीरियाई कैंपों में रहने को मजबूर है. जहां इन्हें कई कठिनाईयों का समाना करना पड़ रहा. जिसमे कैंपों में रह रहे लोगों को एक ऐसी कठिनाई का समाना करना पड़ रहा है. जो बेहद ही शर्मनाक है.

मीडिया खबरों के मुताबिक राहत कैंपों में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से मदद पहुंचा रहे पुरुष राहतकर्मियों ने महिलाओं के साथ भोजन के बदले यौन शोषण किया जा रहा.

मीडिया खबरों के मुताबिक सीरिया के राहत कैंपों में महिलाओं का यौन शोषण किया गया है. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सगठनों की ओर से मदद पहुंचा रहे पुरुष राहतकर्मियों ने महिलाओं के साथ ऐसा किया है.

तीन साल पहले दी गई चेतावनी के बावजूद एक नई रिपोर्ट यह दर्शाती है कि देश के दक्षिणी हिस्से में यौन शोषण जारी है. संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों का कहना है कि क्षेत्र में काम कर रहे उनके सहयोगी संगठनों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली है. जबकि राहतकर्मियों के मुताबिक महिलाओं के साथ शोषण बड़े स्तर पर हो रहा है, जिसकी वजह से सीरियाई महिलाएं वितरण केंद्र जाने से मना कर रही हैं.

एक कर्मी का दावा है कि कुछ मानवतावादी एजेंसियां मामले से आंखें फेर रही थीं क्योंकि उनके लिए ख़तरनाक इलाकों में स्थानीय अधिकारी और सहयोगी संगठन काम कर रहे थे. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के एक मूल्यांकन में यह बात सामने आई थी कि मदद सामग्री देने के बदले महिलाओं का शोषण किया जा रहा था. संगठन ने यह मूल्यांकन पिछले साल सीरिया के विभिन्न प्रशासनिक इलाकों में किया गया था.

भोजन के लिए करनी पड़ती थी शादी 

‘वॉयस फ्रॉम सीरिया 2018’ नाम के इस रिपोर्ट में लैंगिक हिंसा का विश्लेषण किया गया था, जिसमें कई घटनाओं का भी जिक्र था. रिपोर्ट में कहा गया है, “महिलाएं और लड़कियां अधिकारियों से कुछ समय के लिए शादी कर रही थीं ताकि उन्हें खाने-पीने की सामग्री मिलती रहे. बदले में उनसे सेक्स किया जाता था.”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “महिलाओं और लड़कियों से राहतकर्मी उनके फोन नंबर मांगते थे और उन्हें घर ले जाते थे. विधवा और तलाकशुदा महिलाएं निशाने पर ज्यादा होती थीं.”

जब महिलाओं ने उठाई आवाज 

इस तरह की पहली घटना तीन साल पहले सामने आई थी. मदद पहुंचाने वाले एक संगठन के लिए सलाहकार का काम कर रही डेनिएल स्पेन्सर से 2015 में जॉर्डन में कुछ सीरियाई महिलाओं के समूह ने इसकी शिकायत की थी.

स्पेन्सर के मुताबिक “वे लोग तब तक सामग्रियों को रोक कर रखते थे जब तक बदले में उन्हें सेक्स नहीं मिलता था.” वो आगे बताती है, “मुझे याद है कि एक महिला अपने कमरे में रो रही थी. उनके साथ जो हुआ था उससे वो काफी दुखी थी.”

द इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी ने ऐसा ही एक सर्वे जून 2015 में किया था, जिसमें 190 महिलाएं और लड़कियों को शामिल किया था. रिपोर्ट के अनुसार 40 फीसदी महिलाओं ने माना था कि मदद के बदले वो यौन हिंसा की शिकार हुई थीं.

श्रोत-बीबीसी 

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