दो महासागर जो मिलकर भी कभी नहीं मिलते

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हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी का 70 प्रतिशत भाग केवल पानी है. जो पीने लायक नहीं है और इसका अधिकतर भाग पांच महासागरों की सीमाओं के साथ पूरे दुनिया में मौजूद है.

दुनिया में ५ महासागर है. प्रशान्त महासागर, अटलांटिक महासागर, आर्क्टिक महासागर, हिन्द महासागर, दक्षिण महासागर… और तो और इन महासागरों की सीमाओं या फिर इसके अंतिम छोर को देख पाना वैज्ञानिकों के लिए भी काफी मुश्किल है.

समंदर एक ऐसा विषय है जिसमे कई रहस्य छिपे हुए है. आज भी कई वैज्ञानिक इन रहस्यों पर अनुसन्धान कर रहे है.

आप ये जानकर हैरान होंगे की अब तक समंदर के केवल २० प्रतिशत हिस्से पर ही खोज की गई है.

लेकिन इनमें से दो महासागरों की सीमाएं तो ऐसी है जो आपस में मिलते हुए नजर आती हैं. प्रकृति के इस अद्भूत नज़ारें को देखकर पूरी दुनिया हैरान है. आइए आज हम इससे जुड़े कुछ बातें आपको बताते हैं.

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“पानी रे पानी तेरा रंग कैसा जिसमें मिला दो लगे उस जैसा”… १९७२ साल में मनोज कुमार और जया बच्चन की आई फिल्म शोर का यह गाना… इस गाने में पानी का जो संदर्भ इस अर्थ से दिया गया है की, किसी भी चीज में पानी घुलमिल जाता है. 

पर दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां पर दो सागर एक जगह आकर मिलते है लेकिन इनका पानी कभी भी एकदूसरे से नहीं मिलता!

दुनिया कई सारे चमत्कारों से भरी पड़ी है. दुनिया में सात महाद्वीप है और इनके बीच में पांच महासागर फैले हुए हैं

 इसके साथ ही इन पांच महासागरों में हिंद महासागर और प्रशांत महासागर अलास्का की खाड़ी में एक-दूसरे के साथ मिलते है .

लेकिन हैरान करने वाली बात तो ये है कि इन दोनों महासागरों का पानी कभी भी एक-दूसरे के साथ नहीं मिलता है.

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इनमें से एक का पानी हल्के नीले रंग का और वहीं दूसरे का गहरे नीले रंग का नजर आता है.

एक ही जगह का दो अलग अलग रंगों के पानी का यह दृश्य को पहली बार Kent Smith इस फोटोग्राफर ने जुलै २०१० में अपने कैमरे में कैद किए था.

हालांकि लोगों के मन में सालों से ये सवाल है कि, आखिर क्यों इन दो महासागरों के पानी आपस में पूरी तरह से नहीं मिल पातें?

इस बारें में वैज्ञानिकों ने तमाम शोध किए और उन्होंने पाया कि, प्रशांत महासागर का पानी लवण रहित होता है और हल्के नीले रंग का होता है.

तो वहीं हिंद महासागर का पानी लवणयुक्त होता है और गाढ़े नीले रंग का होता है.

मीठे और खारे पानी का घनत्व अलग-अलग होने के कारण वो उपरी सतह पर पूरी तरह से नहीं मिल पाते है और आपस में टकराने पर झाग पैदा करते है.

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ये तो बात रही वैज्ञानिक दृष्टिकोण की लेकिन कुछ लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मानते हैं.

हालांकि वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि भले ही ये उपरी सतह पर नहीं मिलते हो लेकिन कहीं न कहीं इन दोनों का पानी एक-दूसरे से पूरी तरह मिल जाता है.

खैर, कारण चाहे जो भी हो लेकिन प्रकृति के इस खूबसूरत नज़ारे को देखने के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते है और इस दृश्य को देखते ही रह जाते हैं.

कई लोग इसका संबंध धार्मिकता से जोड़ते है, ऐसे कुदरत का करिश्मा समझते है. लेकिन ये सरासर गलत है. इसमें कोई तथ्य नहीं है.

सागर के कई रहस्य अब भी अनसुलझे है. इसमें से एक यह है. लेकिन हम आशा करते है की, ये रहस्य जल्द ही सुलझे जिससे हमारी जिज्ञासा शांत हो सके.

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One thought on “दो महासागर जो मिलकर भी कभी नहीं मिलते

  • September 16, 2018 at 6:23 am
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    Of course it is mentioned in the holy quaran about the gulf of Alaska

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