भारत में सूर्योदय के पहले हि फांसी क्यों दी जाती है?

हर देश के स्वतंत्र कायदे होते हैं और उसके अनुसार ही गुनाहों के स्वरूप के अनुसार निर्धारित की हुई सजाए हैं. भारत में मृत्यदंड अथवा फांसी की सजा सबसे बडी सजा मानी जाती है. इस फांसी की सजा के भी अनेक नियम हैं. मुख्य नियम ऐसा है की फांसी खुली जगह में दे नही सकते बल्कि वह चार दिवारों के भीतर ही देनी चाहिए. और उस समय जल्लाद, डॉक्टर, न्यायाधीश से भेजा हुआ प्रतिनिधी, और कुछ प्रमुख पोलीस अधिकारी ही उपस्थित होने चाहिए.

दुसरा नियम थोडा विचित्र है और जो हर एक को विचार करने पर प्रवृत्त करता है.

वह नियम है

गुनहगार को सुर्योदय के पूर्व हि फांसी दे दी जाए.

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तो ऐसा क्यों?

गुनहगार को सुर्योदय के पूर्व ही  फांसी देने के अनेक कारण हैं.

१) प्रशासकीय कारण

न्यायालय के सजा  सुनाए जाने के  २४ घंटो के अंदर अगर जेल प्रशासन गुन्हेगार को फांसी नही दे पाती है तो फिर से न्यायालय के पास नई तारीख लेने के लिए अर्जी देबी पड़ती है. वैसे ही यह कार्य समय में पुरा न करने का  मतलब न्यायालय के निर्णय की अवमानना  समझी जाएगी . इसलिए नियुक्त दिन को सवेरे ही फांसी निपटाने की प्रथा शुरु हुई.

दुसरी बात यह है कि जेल मॅन्यूअल अनुसार जेल के सभी कार्य सूर्योदय के पश्चात हि शुरु किए जाते हैं. जेल प्रशासन के लिए फांसी एक बडा कार्य है. इसीलिए सवेरे ही यह कार्य निपटा दिया जाता है. जिससे अन्य कामों में बाधा न आए. फांसी के पूर्व और पश्चात अनेक प्रक्रिया पार करनी पडती हैं. जैसे की मेडिकल टेस्ट, रजिस्टर में एन्ट्री और अनेक जगहों पर सूचना देना.

उसके पश्चात गुन्हेगार का मृत शरीर उसके परिवारवालों को सौंप देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होती है. इसीलिए तडके सवेरे ही  फांसी दी जाती है.

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२) नैतिक कारण

ऐसा माना जाता है की, जिसे फांसी होनेवाली है उसे पुरे दिन इंतजार करवाने से उसका मानसिक पीड़ा होगी . उस डर से या पागलपन से गुनहगार  खुद को हानि कर सकता है और फांसी के कार्य में बाधा आ सकती है. और एक कारण ऐसा भी है की, सुबह फांसी देने से सूर्यास्त पूर्व गुन्हेगार का मृत शरीर उसके परिवार को सौंपने से वे समय में उसके अंतिम संस्कार कर सकते हैं.

३) सामाजिक कारण

गुन्हेगार का अगर सामाजिक प्रभाव ज्यादा हो तो उस वजह से सामाजिक जीवन अस्ताव्यस्त होने की संभावना रहती है. सवेरे जल्दी सामाजिक जीवन और खास कर मिडिया क्षेत्र भी शांत रहता है तो अनुचित घटना होने की संभावना नही होती.

तो ऐसी है भारत की सबसे बडी सजा और उस सजा के नियम.

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