यहां शिव लिंग का ही नहीं मर्दों के लिंग की भी होती है पूजा

भारत में शिवलिंग पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही. शिवरात्रि पर संपूर्ण देश में भगवान शिव के लिंग की पूजा होती है. इस पूजा में विशेषतया महिलाएं पूरी आस्था से उपवास करती है. मान्यता है कि जो स्त्री पूरी आस्था व भक्ति से शिवलिंग की पूजा करती है उसे शिव के समान वीर और बलिदानी पुरुष पति के रूप में प्राप्त होते हैं. कई प्राचीन सभ्यताओं में इस तरह की पूजा को प्रजनन क्षमता से जोड़कर देखा जाता था. आज भी इस प्राचीन परंपरा का प्रचलन है. मगर दुनिया में ऐसे भी कुछ देश है जहां सिर्फ शिवलिंग ही नहीं बल्कि मर्दों के प्राइवेट पार्ट की पूजा करते है लोग. इसके अलावा अपने घरों की दीवारों पर मर्दों के प्राइवेट पार्ट की कलाकृति समेत मंदिर और सार्वजनिक स्थानों पर प्राइवेट पार्ट के आकार के शिलाएं बनी रहती है.

घर की दीवारों पर मर्दों के प्राइवेट पार्ट की पेंटिंग बनाने की परंपरा

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भूटान के थिंपू शहर के अंतर्गत आने वाले पुनाखा गांव गांव में घरों के बाहर की दीवारों पर पुरुषों के प्राईवेट पार्ट की पेंटिंग्स बने होते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये भूटान के इस गांव की परंपरा है. जो विश्व भर में काफी चर्चित है. इस परमपरा के पीछे एक अनोखी और लंबी कहानी है.

आशीर्वाद में मिलाता है प्राइवेट पार्ट 

आपको जानकर हैरानी होगी कि भूटान में संतों से मिलने आने वाले कपल को भी आशीर्वाद के तौर पर वे लकड़ी से बना प्राईवेट पार्ट देते हैं. बताया जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत 15वीं शताब्दी में हुई थी. गांव वालों की मानें तो इसे पीनिस आर्ट कहते हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि इस परंपरा की शुरुआत शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के लिए किया गया था. उस समय यहां तिब्बत के गुरु द्रुक्‍पा कुन्‍ले थे, जिन्होंने इसकी शुरुआत की थी.

बताया जाता है कि गुरु द्रुक्‍पा यहां की एक लड़की की सुंदरता से काफी प्रभावित हुए थे. इतना ही नहीं गुरु ने लड़की के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए थे. जिसके बाद लड़की प्रेगनेंट हो गई थी. जिसके बाद लकड़ी के बड़े प्राईवेट पार्ट की मूर्ति बनाकर लगा दी गई, और उस जगह का नाम उर्वरता मठ रख दिया गया था. बता दें कि यहां हर साल लाखों सैलानी आते हैं, जो इन प्राईवेट पार्ट वाली पेंटिंग्स के साथ बड़े ही शौक से फोटो क्लिक कराते हैं.

कानामारा मतसूरी, कावासाकी जापान

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अपने अनोखे रीति-रिवाजों के लिए विख्यात यह देश बाकी देशों की राह से हटकर चलता है. जापान में कानामारा मत्सूरी फेस्टिवल एक ऐसी ही चीज है जिसे ‘स्टील के शिश्न का त्योहार’ के नाम से जाना जाता है. अप्रैल के पहले रविवार को मनाया जाने वाला यह त्योहार प्रजनन को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है.

जापान के कपल्स इस त्योहार को बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं. खालिद नबी सेमेट्री, गोलेस्तन प्रांत, ईरान-उत्तरी-पूर्वी ईरान में कई कब्रिस्तान हैं. यहां लिंग और ब्रेस्ट के आकार में करीब 600 शिलाकृतियां हैं.

होनेन मत्सूरी, कोमाकी, जापान

कनमारा मतसूरी की तरह जापान के कोमाकी में भी हर साल 15 मार्च को प्रजनन क्षमता की प्रतिष्ठा स्थापित करते हुए मर्दों के लिंग की पूजा की जाती है. जापानी प्रतिवर्ष इसे लिंग उत्सव के रूप में मनाते है. इस पूजा में लकड़ी का एक पुरुष लिंग बनाया जाता है। इस लिंग को जापानी समाज में काफी आस्था व भक्ति के भाव से पूजा जाता है. धर्मभीरु जापानी इस पुरुष लिंग को शहरों में पूरे जोश के साथ नाचते गाते हुए शोभायात्रा निकालते हैं. पुराने लिंग को पूजा स्थल से हटाने के बाद नये पुरुष लिंग को पूजा स्थल में स्थापित कर दिया जाता है. इस लिंग का वजन 280 किग्रा. तक रखा जाता है. जापानी मान्यतओं के अनुसार इस प्र्रकार के आयोजन से घर में सुख समृद्धि आती है.

बोरानी फेस्टिवल, ग्रीस

ग्रीस के टायर्नवोस में हर साल बोरानी फेस्टिवल मनाया जाता है. इस त्योहार पर लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ इकठ्ठा होते हैं और अश्लील गाने और लिंग प्रतिकृतियों से एक-दूसरे को चिढ़ाते हैं.

जेजू लवलैंड, साउथ कोरिया

जेजू द्वीप पर बसे जेजू लवलैंड में कई कामुक मूर्तियां लगी हुई हैं. यहां बच्चों का प्रवेश वर्जित है. यह लवलैंड नवविवाहित जोड़ों के लिए लोकप्रिय डेस्टिनेशन है.

द खारखोरिन रॉक, एरडेन जू मोनस्ट्री, मंगोलिया

मंगोलिया में एक बहुत बड़े पत्थर का लिंग स्थापित किया गया था. इसका उद्देश्य यह था कि बौद्ध भिक्षुओं को अपने ब्रहमचर्य जीवन का स्मरण रहे. विडंबना यह है कि यह अब एक धार्मिक स्थल में तब्दील हो चुका है. लोग यहां यौन आजादी और प्रजनन क्षमता का जश्न मनाते हैं.

द सर्न अब्बास जाइंट डोरसेट, इंग्लैंड

यहां प्रजनन क्षमता के प्रतीक के तौर पर चॉक से एक नग्न पुरुष की आकृति रेखांकित है. ऐसी मान्यता है कि इस आकृति के ऊपरी हिस्से पर सेक्स करने से इनफर्टिलिटी की समस्या का समाधान होता है.

मारा कन्नोन फर्टिलिटी श्राइन तावारयामा, जापान

यहां के एक शासक के बेटे की हत्या कर दी गई थी. उसकी आत्मा को खुश करने के लिए 1551 में इस श्राइन को स्थापित किया गया था. मां-बाप बनने की इच्छा रखने वाले कपल्स के बीच यह श्राइन काफी लोकप्रिय है.

फ्रा नांग केव, क्राबी प्रोविंस, थाइलैंड

स्थानीय लोगों के मुताबिक, गुफा में लिंग की आकृति का स्टैचू रखने से समुद्री यात्रियों की सुरक्षा होती है. ऐसा बुरी आत्माओं को आकर्षित करने के लिए किया जाता है.

 

द आइसलैंड फैलोलॉजिकल म्यूजियम, हुसाविक

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आय़रलैंड एक मजाक के तौर पर शुरू हुआ यह संग्रहालय अब दुनिया भर में लिंग के सबसे बड़े संग्रहालय के तौर पर जाना जाता है. इस संग्रहालय में 93 विभिन्न प्रजातियों के जानवरों के 282 से ऊपर लिंग संग्रहित किए गए हैं. म्यूजियम ऑफ सेक्स, न्यू यॉर्क सिटी, यूएसए-2002 में खोले गए इस म्यूजियम में मानव की सेक्सुअलिटी के इतिहास, विकास और सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया जाता है. यहां लगातार प्रदर्शनी आयोजित की जाती है. दुनिया भर के जिज्ञासु पर्यटक यहां आते रहते हैं.

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